भंडारा में मक्का किसानों के 12 करोड़ रुपये अटके, समर्थन मूल्य भुगतान में देरी से संकट

Maize Farmer Payment: भंडारा जिले में समर्थन मूल्य पर मक्का बेचने वाले 2217 किसानों का 12 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान लंबित है। किसान खरीफ सीजन से पहले बकाया राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं।
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भंडारा मक्का किसान- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bhandara Maize Farmers: भंडारा जिले में समर्थन मूल्य पर मक्का बेचने वाले किसानों को अब तक पूरी भुगतान राशि नहीं मिल सकी है। भुगतान में देरी के कारण किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। खेती के नए सीजन की तैयारियों के बीच बकाया राशि नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसान जल्द से जल्द लंबित भुगतान जारी करने की मांग कर रहे हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में 2217 किसानों से कुल 90,987.30 क्विंटल मक्का की खरीदी की गई। इस खरीदी के अनुसार किसानों को कुल 21 करोड़ 83 लाख 69 हजार 520 रुपये का भुगतान किया जाना है। अब तक शासन के प्रधान कार्यालय से 9 करोड़ 73 लाख 96 हजार 560 रुपये की राशि प्राप्त हुई है।

खेती सीजन शुरू

प्राप्त धनराशि में से 9 करोड़ 73 लाख 19 हजार 520 रुपये 6 जुलाई तक किसानों के खातों में वितरित किए जा चुके हैं। इसके बावजूद किसानों के 12 करोड़ 9 लाख रुपये से अधिक का भुगतान शासन स्तर पर लंबित है। भुगतान में लगातार हो रही देरी से किसान परेशान हैं।

लेकिन मक्का किसानों के खाते खाली

उनका कहना है कि खरीफ सीजन शुरू हो चुका है और उन्हें बीज, खाद, कीटनाशक तथा अन्य कृषि कार्यों के लिए तत्काल धन की आवश्यकता है। समय पर भुगतान नहीं मिलने से उन्हें कर्ज लेने या ऊंची ब्याज दर पर उधार लेने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है।

जल्द करें भुगतान, किसानों की मांगकिसानों का कहना है कि सरकार की ओर से समर्थन मूल्य पर खरीदी का उद्देश्य किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, लेकिन यदि भुगतान समय पर नहीं मिलता तो इस व्यवस्था का लाभ अधूरा रह जाता है।

12 करोड़ रुपये भुगतान अटका

किसानों ने मांग की है कि शासन लंबित राशि जल्द जारी कर सभी पात्र किसानों के बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित करे। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि समय पर भुगतान होने से किसानों को अगली फसल की तैयारी में मदद मिलती है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। ऐसे में लंबित भुगतान जल्द जारी किया जाना आवश्यक है, ताकि किसानों को राहत मिल सके और वे बिना आर्थिक परेशानी के खरीफ मौसम की खेती कर सकें।

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