Mahajyoti fund 500 crore (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mahajyoti Training Scheme Delay: विधायक डॉ. परिणय फुके ने विधान परिषद में कहा कि महात्मा ज्योतिराव फुले अनुसंधान व प्रशिक्षण संस्थान (महाज्योति) के माध्यम से संचालित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण योजनाओं में हुई देरी के कारण हजारों विद्यार्थियों को नुकसान हुआ है। पिछले छह महीनों से प्रशिक्षण प्रक्रिया लंबित है। लगभग 500 करोड़ रुपये की निधि उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया गया, इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
शुक्रवार को विधान परिषद में लक्षवेधी सूचना के माध्यम से डॉ. फुके ने विद्यार्थियों को हुए नुकसान और महाज्योति में प्रशासनिक देरी का मुद्दा गंभीरता से उठाया। उन्होंने बताया कि महाज्योति के माध्यम से आईबीपीएस, रेलवे, कर्मचारी चयन आयोग (SSC), मिलिटरी, पुलिस भर्ती, एमबीए-सीईटी और नेट-सेट जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण योजनाएं संचालित की जाती हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों से प्रशिक्षण प्रक्रिया में हुई देरी के कारण हजारों विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। स्पर्धा परीक्षा प्रशिक्षण के लिए महाज्योति को कुल 49,358 विद्यार्थियों के आवेदन प्राप्त हुए, लेकिन अब तक उनके परिणाम घोषित नहीं किए गए हैं।
‘महाज्योती’ संस्थेत कोट्यवधींचा भ्रष्टाचार झाल्याची गंभीर बाब आज विधानपरिषदेत निदर्शनास आणून दिली. या प्रकरणाची चौकशी करून कारवाई करण्याचे सकारात्मक उत्तर राज्याचे मंत्री मा.ना.श्री. अतुलजी सावे यांनी दिले.#DrParinayFuke #BJP4Maharashtra #BJP4ViksitBharat #BudgetSession pic.twitter.com/ZkU18yuSs6 — Dr. Parinay Fuke (@Parinayfuke) March 13, 2026
डॉ. फुके ने बताया कि अगस्त 2025 में महा-ई-टेंडर प्रणाली के माध्यम से नामांकित प्रशिक्षण संस्थाओं के चयन के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद निविदा प्रक्रिया अंतिम रूप नहीं ले सकी। इसके कारण प्रशिक्षण शुरू नहीं हो पाया और विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने आगे बताया कि 11 सितंबर 2025 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में महाज्योति के लिए 300 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई थी। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 299 करोड़ रुपये और पूर्व के 200 करोड़ रुपये लंबित निधि मिलाकर लगभग 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे। इसके बावजूद इस निधि का उपयोग नहीं किया गया। डॉ. फुके ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
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इस मुद्दे पर जवाब देते हुए संबंधित मंत्री ने कहा कि महाज्योति की प्रशिक्षण योजनाओं, निविदा प्रक्रिया और निधि के उपयोग को लेकर मिली शिकायतों को सरकार गंभीरता से ले रही है। पूरे मामले की विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और विद्यार्थियों के हितों को किसी भी प्रकार की हानि नहीं होने दी जाएगी।