Gondia POCSO Court Verdict: 7 साल की बच्ची से दुष्कर्म, गोंदिया कोर्ट का सख्त फैसला, आरोपी को आजीवन कारावास

Gondia POCSO Court: गोंदिया में 7 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के मामले में विशेष POCSO न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पीड़िता को जुर्माने की राशि देने के भी निर्देश दिए है।
Gondia POCSO Court
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स सोशल मीडिया)
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Gondia POCSO Court Verdict: महाराष्ट्र के गोंदिया जिले से न्याय व्यवस्था की मजबूती को दर्शाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां की विशेष पॉक्सो (POCSO) न्यायालय ने सात वर्ष की मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले एक आरोपी को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है।

यह मामला 8 मई 2024 को घटित हुआ था, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। घटना के ठीक एक वर्ष, 10 महीने और 3 दिन बाद सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश के.एन. गौतम ने सोमवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को उसके किए की सजा दी।

मूकबधिर स्कूल शिक्षक की गवाही और कानूनी प्रक्रिया

न्यायालय द्वारा सजा सुनाए गए दोषी का नाम लक्ष्मण उर्फ मुका इसरु ब्राम्हणकर (47) है, जो गौतमनगर का निवासी है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और अभियोजन पक्ष ने गहन जांच की थी। पीड़िता की मां द्वारा गोंदिया शहर थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद यह मामला प्रकाश में आया था। मुकदमे के दौरान न्यायालय के समक्ष कुल 11 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इस मामले में एक चुनौतीपूर्ण पहलू यह था कि आरोपी स्वयं मूकबधिर है। कानूनी प्रक्रिया को निष्पक्ष और सटीक बनाए रखने के लिए, एक मूकबधिर स्कूल के शिक्षक की सहायता ली गई और उनके माध्यम से आरोपी के बयान और साक्ष्य दर्ज किए गए। यह कदम कानूनी प्रक्रिया में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ। हालांकि बचाव पक्ष की ओर से आरोपी के बेटे ने भी पिता के पक्ष में गवाही दी थी, लेकिन न्यायालय ने उपलब्ध ठोस साक्ष्यों को प्राथमिकता दी।

सश्रम आजीवन कारावास और पीड़िता को आर्थिक सहायता

न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों, चिकित्सा रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर विशेष न्यायाधीश के.एन. गौतम ने लक्ष्मण ब्राह्मणकर को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माना अदा करने में विफल रहता है, तो उसे दो वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

न्यायालय ने केवल सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि पीड़िता के भविष्य और उसके पुनर्वास के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाई। न्यायाधीश ने जिला विधि सेवा प्राधिकरण को कड़े निर्देश दिए हैं कि आरोपी पर लगाए गए जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की जाए।

इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में सरकार की ओर से सहायक संचालक एडवोकेट सतीश घोडे ने मजबूती से पैरवी की। न्यायालय के इस फैसले का स्थानीय नागरिकों ने स्वागत किया है, क्योंकि यह महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले जघन्य अपराधों में न्याय की उम्मीद को और पुख्ता करता है।

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