ई-20 पेट्रोल पर बढ़ी बहस, मिक्सड इथेनॉल को लेकर हंगामा, डीलर और उपभोक्ताओं ने जताई चिंता
E-20 Petrol: देश में ई-20 पेट्रोल को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सरकार ने 2030 की समयसीमा से पांच साल पहले कर दिया है। इस पर जनता ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
- Written By: प्रिया जैस
ई-20 पेट्रोल (सौजन्य-नवभारत)
Bhandara News: देशभर में ई-20 पेट्रोल (20% एथेनॉल व 80% पेट्रोल) का विस्तार सरकार ने 2030 की समयसीमा से पांच साल पहले कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना, घरेलू एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना और पर्यावरणीय प्रभाव को घटाना है।
हालांकि उपभोक्ताओं, खासकर पुराने वाहन मालिकों ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ई-20 से माइलेज घट रहा है, इंजन को नुकसान पहुंच सकता है और रखरखाव का खर्च बढ़ेगा। ई-20 को लेकर बहस ने ईंधन नीति और उपभोक्ता हितों के बीच नया संतुलन तलाशने की चुनौती खड़ी कर दी है।
पुराने वाहनों को खतरा
गाड़ियों के व्यवसायी बाबू डीलर ने कहा की ई-20 पेट्रोल से पुराने वाहनों को खतरा है। यदि आपकी कार या बाइक ई-20 समर्थित नहीं है तो यह पेट्रोल लंबे समय में वाहन के रबर और प्लास्टिक पार्ट्स को नुकसान पहुंचा सकता है तथा मेटल पार्ट्स में जंग भी लगा सकता है। जिन वाहनों की टंकी पर ई-20 लिखा है या जिनमें ई-20 सपोर्टेड इंजन है, उन्हें किसी तरह की चिंता नहीं है। सबसे ज्यादा असर BS3 और BS4 गाड़ियों पर पड़ सकता है, जबकि BS6 वाहनों में यह खतरा बेहद कम है। ऐसे में पुराने वाहन मालिकों को ईंधन के चयन में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह है।
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ईंधन चयन उपलब्ध नहीं
सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद केसलकर ने कहा की सरकार ने जो नियम 2030 तक लागू होने थे, उन्हें 2025 से ही लागू कर दिया है। अब देशभर के पेट्रोल पंपों पर केवल ई-20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन उपलब्ध है। पुराने वाहन मालिकों के लिए यह कदम परेशानी खड़ा कर रहा है क्योंकि ई-20 से इंजन को नुकसान और रखरखाव खर्च बढ़ रहा है। आग्रह है कि पेट्रोल पंपों पर ई-10 पेट्रोल की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। कम से कम अगले पांच वर्षों तक उपभोक्ताओं को दोनों विकल्प दिए जाने चाहिए ताकि उन्हें राहत मिल सके। शहर के एक भी पेट्रोल पंप की मशीन पर ई-20 लिखा नहीं है।
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राजनीतिक परिवार को लाभ
शांति मोटर्स के निदेशक स्वप्निल भोंगाडे ने बताया की पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बनाई गई इस नीति से आम जनता को तो नुकसान हो रहा है, लेकिन नेताओं को कथित तौर पर सीधा लाभ मिल रहा है। कहा जा रहा है कि मंत्री लंबे समय से एथानॉल की लॉबीयिंग कर रहे थे और पेट्रोल मंत्रालय का पद न होते हुए भी अपने प्रभाव से नियमों में बदलाव करवाए। नतीजतन, उनके परिवार को व्यावसायिक फायदा मिल रहा है जबकि पुराने वाहन चालकों सहित आम भारतीय उपभोक्ता बढ़ती समस्याओं से जूझ रहे हैं।
