पर्यावरण बचाने के लिए विद्यार्थियों का सराहनीय प्रयास, 1,500 सीड बॉल तैयार किए

Bhandara News: भंडारा के वसंतराव नाईक विद्यालय, चांदोरी के विद्यार्थियों ने साकोली सामाजिक वनीकरण विभाग के सहयोग से 1,500 सीड बॉल बनाए। इसका उद्देश्य वनीकरण और जैव विविधता को बढ़ावा देना।
Commendable efforts of students prepared 1500 seed balls
सीड बॉल के साथ छात्र व शिक्षक (फोटो नवभारत)
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Bhandara News In Hindi: भंडारा जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जिले के वसंतराव नाईक विद्यालय, चांदोरी के विद्यार्थियों ने 1,500 सीड बॉल तैयार किए हैं। यह पहल सामाजिक वनीकरण विभाग, साकोली के सहयोग से चलाए जा रहे 'सीड बॉल उपक्रम' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वनीकरण और जैव विविधता को बढ़ावा देना है। 5वीं से 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक इस कार्य में भाग लिया।

उपक्रम का उद्देश्य और लाभ

वनरक्षक एच.पी. कुलसंगे ने बताया कि इस उपक्रम के तहत तैयार किए गए सीड बॉल से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय समुदायों को सामाजिक और आर्थिक फायदे भी मिलेंगे। सीड बॉल में मिट्टी के साथ आंवला के बीज डाले गए हैं, जो बाद में वर्षा के दौरान अंकुरित होकर पौधे बनेंगे। खेल संगठक शाहेद कुरैशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पौधारोपण और वन संवर्धन जैसे कार्यों में सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस तरह की पहल से जंगलों का संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा, मिट्टी का कटाव रोकना और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना संभव होता है। इसके अलावा, इससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।

विद्यार्थियों का उत्साह और शिक्षकों का सहयोग

इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने मिट्टी के गोले बनाकर उनमें बीज डाले और उन्हें अंकुरित भी होते देखा, जिससे उनका उत्साह और भी बढ़ गया। इस दौरान सामाजिक वनीकरण विभाग, साकोली की टीम से वनरक्षक कुलसंगे, वाहन चालक ए.पी. उंदीरवाडे, मोरेश्वर शहारे, और साधू बावणे उपस्थित थे, जिन्होंने छात्रों का मार्गदर्शन किया। इस सराहनीय प्रयास के लिए संस्था अध्यक्ष विद्या कटकवार और संचालक मनोहर राखडे ने विद्यार्थियों को बधाई दी।

विद्यालय के मुख्याध्यापक आर.एच. हारगुडे, अश्विनी राजुरकर, मनीषा हातझाडे, खीतीलेश चांदेवार, और दर्शन कटकवार ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष सहयोग दिया। यह पहल दिखाती है कि कैसे छोटे-छोटे प्रयासों से भी पर्यावरण संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।

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