भंडारा जिला परिषद का 'ब्लंडर'! जनता के ₹35 करोड़ सरकारी खजाने में होंगे वापस; आखिर कौन है जिम्मेदार?

Bhandara Zilla Parishad Budget: भंडारा जिला परिषद की बड़ी लापरवाही! विकास कार्यों के ₹35.49 करोड़ वापस होने की कगार पर। निर्माण और सिंचाई विभाग का प्रदर्शन सबसे खराब। यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Bhandara Zilla Parishad faces a crisis as ₹35.49 crore of district funds are set to lapse.
भंडारा नगर परिषद (सौजन्य-नवभारत)
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ZP Fund Lapse News: भंडारा जिला परिषद के वित्तीय वर्ष 2025-26 का अंतिम लेखा-जोखा सामने आते ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। आंकड़ों के विश्लेषण से यह चिंताजनक तथ्य उजागर हुआ है कि प्रशासनिक देरी और सुस्त कार्यप्रणाली के कारण लगभग 35 करोड़ 49 लाख रुपये का जिला निधि सरकारी खजाने में वापस जाने की कगार पर है।

मार्च का महीना समाप्त होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, ऐसे में जिला परिषद के स्वनिधि से होने वाले ग्रामीण विकास कार्यों की कछुआ चाल ने प्रशासन की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जिला परिषद को इस वित्तीय वर्ष में कुल 559 करोड़ 12 लाख 62 हजार 178 रुपये का भारी-भरकम फंड प्राप्त हुआ।

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, अब तक 507 करोड़ 35 लाख 88 हजार 697 रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जो कुल बजट का लगभग 90.74 प्रतिशत है। ऊपरी तौर पर यह आंकड़ा संतोषजनक लग सकता है, लेकिन गहराई से जांच करने पर पता चलता है कि यह खर्च मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं और स्थापना मद में हुआ है। जिला परिषद के अपने विवेकाधीन फंड, जिसे जिला निधि कहा जाता है, उसके नियोजन और खर्च में घोर लापरवाही बरती गई है।

निधि के प्रकार और खर्च की स्थिति

निधि के प्रकार और खर्च की स्थिति पर गौर करें तो हस्तांतरण योजनाओं के तहत प्राप्त 489 करोड़ रुपये में से 96.9 प्रतिशत राशि खर्च हो चुकी है। इसमें प्राथमिक शिक्षा विभाग ने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर अपनी उपयोगिता साबित की है। इसी तरह अभिकरण योजनाओं में भी महिला एवं बाल कल्याण विभाग का प्रदर्शन सराहनीय रहा है, जहां 93.61 प्रतिशत फंड का इस्तेमाल हुआ।

असली समस्या जिला निधि के मोर्चे पर है। इस मद में उपलब्ध 52 करोड़ 14 लाख रुपये में से केवल 16 करोड़ 65 लाख रुपये ही खर्च हो पाए हैं, जो कुल राशि का मात्र 31.94 प्रतिशत है।विभागीय प्रदर्शन की बात करें तो निर्माण विभाग और लघु सिंचाई विभाग की स्थिति सबसे खराब है। जिला निधि के अंतर्गत निर्माण विभाग का खर्च महज 24.66 प्रतिशत रहा है, जबकि ग्रामीण जलापूर्ति विभाग केवल 15.64 प्रतिशत राशि ही खर्च कर पाया है।

समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले कई हेडकोड में तो खर्च का पैमाना 5 प्रतिशत से भी नीचे दर्ज किया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की मरम्मत, पीने के पानी की व्यवस्था और छोटे बांधों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।

प्रशासन की सुस्ती को लेकर आक्रोश

ग्रामीण क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में इस सुस्ती को लेकर भारी आक्रोश है। 31 मार्च की समय सीमा सिर पर है और इतनी बड़ी राशि को कुछ ही दिनों में तकनीकी प्रक्रियाओं के साथ खर्च करना प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। यदि यह निधि समय रहते आवंटित नहीं हुई, तो नियमों के अनुसार यह राशि लैप्स होकर शासन को वापस चली जाएगी, जिसका खामियाजा भंडारा जिले की ग्रामीण जनता को भुगतना पड़ेगा।

प्रमुख आंकड़े एक नजर में

  • कुल बजट: 559.12 करोड़ रुपये
  • कुल खर्च (90.74%): 507.35 करोड़ रुपये
  • जिला निधि (स्वनिधि): 52.14 करोड़ रुपये
  • जिला निधि खर्च (31.94%): 16.65 करोड़ रुपये
  • खतरे में शेष राशि: 35.49 करोड़ रुपये

जिला परिषद बजट और विभागीय प्रदर्शन का विवरण

क्रमांक विभाग का नाम प्राप्त निधि (₹) खर्च (₹) शेष निधि (₹) खर्च प्रतिशत
1 शिक्षा (प्राथमिक) 245,90,87,974 236,61,45,250 9,29,42,724 96.22%
2 सामान्य प्रशासन 106,51,78,695 104,37,15,732 2,14,62,963 97.98%
3 ग्राम पंचायत 53,24,41,424 52,75,34,296 49,07,128 99.07%
4 स्वास्थ्य विभाग 13,86,47,814 10,89,37,982 2,97,09,832 78.57%
5 निर्माण विभाग 52,69,14,795 35,74,62,728 16,94,52,067 67.84%
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