Bhandara: कागजों पर 'सुपर 7' टीमें, पर मैदान में अधूरी प्यास; जल जीवन मिशन के 57% काम के बाद भी संकट बरकरार

Bhandara Water Crisis: भंडारा में ₹2.07 करोड़ का जल संकट प्लान फाइलों में कैद! गिरता भूजल स्तर बना बड़ी चुनौती। 57% नल योजना पूरी, लेकिन बजट के अभाव में प्यास बुझाना मुश्किल।
Bhandara's ₹2.07 Cr water action plan stuck due to lack of funds. Falling groundwater levels pose a threat from April to June. 57% of Jal Jeevan Mission complete.
भंडारा जल संकट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Bhandara Water Tanker Supply: सूरज की तपिश बढ़ने के साथ ही भंडारा जिले में प्यास का पारा भी चढ़ने लगा है। प्रशासन ने संभावित जल संकट से निपटने के लिए 2.07 करोड़ रुपये का किल्लत निवारण प्लान तो तैयार कर लिया है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि बजट की किल्लत ने इस योजना को फाइलों से बाहर नहीं निकलने दिया है। फंड के अभाव में फिलहाल यह पूरी कवायद केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित रह गई है।

राहत की बात यह है कि मार्च 2026 तक जिले में किसी भी गांव को टैंकर से पानी देने या निजी कुओं के अधिग्रहण की नौबत नहीं आई। लेकिन असली चुनौती अप्रैल से जून के तीसरे चरण में है। जिले में तेजी से गिरता भूजल स्तर प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। जिलाधिकारी कार्यालय फिलहाल युद्ध स्तर पर तीसरे चरण की कार्ययोजना बनाने में जुटा है ताकि आने वाले भीषण सूखे से निपटा जा सके।

Bhandara में मरम्मत के लिए 7 सुपर टीमें अलर्ट पर

ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने बंद पड़े संसाधनों को पुनर्जीवित करने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। पेयजल व्यवस्था सुचारू रखने के लिए जिले में निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं। जिले के कुल 6,131 हैंडपंपों में से 5,936 वर्तमान में सुचारू हैं। गर्मियों के मद्देनजर विशेष अभियान चलाकर 195 खराब हैंडपंपों को दुरुस्त किया गया है। सभी 7 तहसीलों में एक-एक विशेष मरम्मत दस्ता तैनात किया गया है, जो शिकायत मिलते ही मौके पर पहुंचकर सुधार कार्य करता है।

57% लक्ष्य पूरा, फिर भी अधूरी प्यास

जिले में हर घर नल योजना के तहत लगभग 57 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। पिछले एक दशक में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई इलाकों में पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि इसका कारण तकनीकी खामी नहीं, बल्कि प्राकृतिक बदलाव है। पुराने जल स्रोत सूख रहे हैं और नई पाइपलाइन व नल योजनाओं का काम शासन से शेष निधि मिलने के इंतजार में अधर में लटका है।

टैंकर से जलापूर्ति वाले गांवों की संख्या शून्य

फिलहाल जिले में टैंकर से जलापूर्ति वाले गांवों की संख्या शून्य है, लेकिन यदि समय रहते बजट प्राप्त नहीं हुआ और गिरते भूजल स्तर पर काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले तीन महीने नागरिकों के लिए अत्यंत कष्टकारी साबित हो सकते हैं।

एक नजर में जिले की स्थिति

कुल हैंडपंप- 6,131 तैयार आराखडा- 2.07 करोड़ रुपये जल जीवन मिशन- 57% कार्य पूर्ण मरम्मत दस्ते- 7 (प्रत्येक तहसील में एक)

वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी

ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अभियंता हितेश खोब्रागडे ने कहा तीसरे चरण के प्लान पर काम जारी है। जिन क्षेत्रों में जल स्तर काफी नीचे चला गया है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। जैसे ही शासन से शेष निधि प्राप्त होगी, सभी लंबित योजनाओं को तत्काल पूर्ण कर लिया जाएगा।

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