छत से गिर रहा प्लास्टर; जर्जर इमारत में इलाज या जान का जोखिम? 360 लोहे के खंभों के सहारे भंडारा जिला अस्पताल

Hospital Dilapidated Building: भंडारा जिला अस्पताल की जर्जर इमारत को 360 लोहे के खंभों का सहारा है। छत से प्लास्टर गिरने के बीच मरीजों की सुरक्षा को लेकर स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग तेज हुई।
Bhandara District Hospital Dilapidated Building Iron Pillars
भंडारा जिला अस्पताल की जर्जर इमारत(फोटो नवभारत)
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Bhandara District Hospital Dilapidated Building: भंडारा जिला सामान्य अस्पताल की मुख्य इमारत की जर्जर हालत ने मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल की छत और अन्य हिस्सों से प्लास्टर उखड़कर गिर रहा है। प्रसव पूर्व कक्ष क्रमांक 8 और पुरुष जनरल वार्ड क्रमांक 9 समेत कई हिस्सों में छत की परतें कमजोर हो चुकी हैं।

स्थिति इतनी गंभीर है कि इमारत को सहारा देने के लिए करीब 360 लोहे के खंभे लगाए गए हैं। जिले के साथ पड़ोसी मध्य प्रदेश से भी मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। रोजाना बड़ी संख्या में मरीजों और परिजनों की आवाजाही के बीच किसी हिस्से के अचानक गिरने का खतरा चिंता बढ़ा रहा है। अस्पताल का प्रबंधन अब शासकीय मेडिकल कॉलेज के पास है और यहां बिस्तरों की संख्या भी बढ़ाई गई है।

नगर पालिका ने थमाया था नोटिस

जर्जर इमारत को लेकर नगर पालिका की ओर से करीब दो वर्ष पहले नोटिस जारी किया गया था। सर्वेक्षण के बाद इमारत का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने तथा आवश्यकतानुसार जीर्णोद्धार और मरम्मत के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद इमारत की मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने कहा कि 360 लोहे के खंभे लगाने की नौबत आने तक प्रशासन क्या कर रहा था, यह गंभीर प्रश्न है। उन्होंने हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही सुरक्षा उपाय करने की जरूरत बताई। सांसद ने स्वतंत्र विशेषज्ञों से तत्काल स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने और खतरनाक हिस्सों को खाली कराकर मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।

Bhandara District Hospital Dilapidated Building Iron Pillars
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मरम्मत कार्य चल रहा

अस्पताल की स्थिति को लेकर मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जहां छत को सहारा देने के लिए लोहे के खंभों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि मरम्मत का काम लगातार किया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. संदीप गजभिये के अनुसार, जिला अस्पताल की इमारत की नियमित देखभाल की जाती है और आवश्यकतानुसार हर वर्ष मरम्मत कार्य कराया जाता है।

वर्तमान में लोक निर्माण विभाग की ओर से मरम्मत जारी है और मरीजों को किसी तरह का खतरा न हो, इसका ध्यान रखा जा रहा है। हालांकि, जर्जर हिस्सों और लगातार गिरते प्लास्टर के बीच स्वतंत्र स्ट्रक्चरल ऑडिट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो गई है।

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