तेंदूपत्ता संग्राहक (फाइल फोटो)
Tendu Leaf Collection Maharashtra: भंडारा जिले के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से जुड़े लगभग आधे मजदूरों को बोनस प्रदान किया जा चुका है। वन विभाग ने शेष तेंदूपत्ता संग्राहकों को उनके पारिश्रमिक और बोनस का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
डिजिटल इंडिया और पारदर्शिता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वन विभाग ने जिले में अब तक 8,222 तेंदूपत्ता संग्राहकों के बैंक खातों में 1,21,28,658 रुपये सफलतापूर्वक जमा कर दिए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि संग्रहण कार्य से जुड़े हर हाथ को उसकी मेहनत का फल बिना किसी देरी और बिचौलियों के हस्तक्षेप के प्राप्त हो।
पूरे जिले की बात करें तो तेंदूपत्ता संग्रहण और उससे संबंधित अन्य भुगतानों का कुल आंकड़ा 2,45,15,560 रुपये तक पहुंच गया है। यह पूरी राशि कुल 16,458 संग्राहकों के खातों में जमा की जानी है, जिसमें से आधे से अधिक कार्य संपन्न हो चुका है।प्रशासनिक सूत्रों ने जानकारी दी है कि वर्तमान में 8,236 तेंदूपत्ता संग्राहकों के बैंक खातों में रकम डालने की तकनीकी प्रक्रिया प्रगति पर है।
इन शेष खाताधारकों को कुल 1,23,86,902 रुपये का भुगतान किया जाना शेष है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केवाईसी और बैंक खातों के सत्यापन में आने वाली मामूली दिक्कतों के कारण कुछ भुगतान रुके हुए हैं, जिन्हें शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा। संग्राहकों को आश्वस्त किया गया है कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
16,458 – कुल संग्राहक
2,45,15,560 – रुपये कुल भुगतान राशि
1,23,86,902 – रुपये शेष भुगतान राशि
17,346 – पिछले वर्ष संग्राहक
4,70,82,619 – रुपये पिछला वर्ष बोनस
इस बार तेंदूपत्ता संग्रहण की नीति में एक महत्वपूर्ण और मानवीय बदलाव देखा जा रहा है। सरकार के पास जमा हुई पूरी राशि अब संग्राहकों को बोनस के रूप में वापस लौटाई जा रही है। पूर्व के वर्षों में इस राशि का एक बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने में जमा हो जाता था, जिससे मजदूरों को उनके लाभ से वंचित रहना पड़ता था। अब सरकार ने निर्णय लिया है कि तेंदूपत्ता की बिक्री से होने वाला लाभ सीधे उन लोगों को मिलना चाहिए जो कड़ी धूप में जंगलों से पत्तियां चुनकर लाते हैं।
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इस वर्ष के आंकड़े पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम नजर आ रहे हैं। वर्ष 2024 के आंकड़ों पर नजर डालें तो उस समय 17,346 तेंदूपत्ता संग्राहकों को 4,70,82,619 रुपये की भारी-भरकम राशि बोनस के रूप में वितरित की गई थी। इसके मुकाबले वर्ष 2025 में बोनस की राशि और लाभार्थियों की संख्या, दोनों में गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, जंगलों में लगने वाली आग या संग्रहण के दिनों में आई कमी इस गिरावट का मुख्य कारण हो सकती है। फिर भी, सरकार की ओर से पूरी लाभ राशि को बोनस के रूप में बांटने के फैसले ने संग्राहकों के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजा है।