Bhandara News: राज्य में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां 2 मई से 14 जून तक घोषित की गई हैं, लेकिन इस बार शिक्षकों को इन छुट्टियों का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। लंबे समय से लंबित पड़ी जनगणना प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जिसके पहले चरण में घर-घर सर्वेक्षण का जिम्मा शिक्षकों को सौंपा गया है। इस निर्णय से शिक्षक वर्ग में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सरकारी निर्देशों के अनुसार, अनुदानित और गैर-अनुदानित स्कूलों के सभी शिक्षकों के लिए यह कार्य अनिवार्य किया गया है। 27 अप्रैल से 8 मई के बीच प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि 16 मई से 14 जून तक घरों की गणना और सूची तैयार करने का कार्य किया जाएगा। इस अवधि में शिक्षकों को मुख्यालय या गांव छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
तेज गर्मी में घर-घर सर्वे करना शारीरिक रूप से कठिन होने के कारण शिक्षक संगठनों ने दिव्यांग शिक्षकों को इस कार्य से मुक्त करने की मांग तेज कर दी है। इस संबंध में अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि छुट्टियों में काम करने वाले शिक्षकों को बदले में विशेष या अर्जित अवकाश दिया जाएगा। हालांकि, शिक्षक संगठनों का तर्क है कि शैक्षणिक सत्र के बीच अवकाश लेने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी और शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।
शिक्षिका शोभा गायधने ने कहा कि सालभर की व्यस्तता के बाद गर्मी की छुट्टियां ही परिवार के साथ समय बिताने का अवसर होती हैं, लेकिन अब योजनाएं रद्द करनी पड़ रही हैं, जिससे मानसिक थकान बढ़ रही है।
शिक्षिका शारदा खंडाईत के अनुसार, यह समय परीक्षा और परिणाम का होता है, ऐसे में तुरंत प्रशिक्षण शुरू होने से आराम का अवसर नहीं मिल रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जनगणना का कार्य छुट्टियों में ही क्यों कराया जा रहा है।
शिक्षिका दीपेश्वरी झोडे ने बताया कि जुलाई में प्रस्तावित टीईटी परीक्षा की तैयारी भी इससे प्रभावित हो रही है, जिससे शिक्षकों में असंतोष और बढ़ गया है।