भंडारा की सड़कों पर हादसों का खतरा, मंडरा रहीं मौत! गड्ढों का नहीं, लोगों का प्रशासन पर फूटा गुस्सा
Bhandara News: भंडारा की सड़कें गड्ढों में तब्दील, अधूरी गटर व जलापूर्ति योजना से शहर की सूरत बिगड़ गई है। 3 साल से नागरिक परेशान, हादसों का खतरा बढ़ा, प्रशासन पर गुस्सा फूटा।
- Written By: आकाश मसने
भंडारा की सड़क उखड़ी (फोटो नवभारत)
Bhandara News In Hindi: भंडारा शहर की सड़कें नागरिकों के लिए सुविधाजनक सफर का मार्ग नहीं रह गई है, बल्कि हादसों का खतरा बन गई हैं। भूमिगत गटर और जलापूर्ति योजना के अधूरे कार्यों और उखड़ी सड़कों ने पूरे शहर को गड्ढों का जाल बना दिया है। तीन साल से अधिक समय बीतने के बावजूद न सड़कें दुरुस्त की गईं, न योजना पूरी हुई। नागरिकों का सब्र अब टूटने लगा है और प्रशासन की लापरवाही पर गुस्सा साफ झलकने लगा है।
शहर में पिछले कुछ वर्षों से भूमिगत गटर और जलापूर्ति योजना का काम जारी है। इस योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सड़कें खोदी गईं, लेकिन कार्य पूरा न होने से शहर की सूरत पूरी तरह बिगड़ चुकी है। नागरिकों को रोजाना गड्ढों से भरी सड़कों से गुजरना पड़ता है। यह स्थिति अब सिर्फ परेशानी तक सीमित नहीं रही, बल्कि हादसों का बड़ा कारण बन गई है।
पहले चरण में अधिकांश मुख्य सड़कों पर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन कई वार्डों में अभी तक खुदाई नहीं हुई। इससे नागरिकों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। खात रोड, राजगोपालचारी वार्ड, संताजी वार्ड, आंबेडकर वार्ड जैसे क्षेत्रों की हालत अत्यंत दयनीय है।
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जगह-जगह बने गहरे गड्ढों से वाहन चालक हर रोज जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं। खासकर रात के समय ये खड्डे बड़े खतरे का कारण बनते हैं। कई दोपहिया और चारपहिया वाहन गड्ढों में फंसकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। पिछले तीन वर्षों से यह योजना कछुआ गति से चल रही है। प्रशासन ने केवल अस्थायी तौर पर सीमेंट का प्लास्टर कर खानापूर्ति की, जो अब उखड़ चुका है।
ठेकेदारों की मनमानी चल रही
नागरिकों का कहना है कि योजना का काम गुणवत्तापूर्ण नहीं है और केवल ठेकेदारों की मनमानी चल रही है। यही वजह है कि दो वर्ष बीतने के बावजूद कई सड़कें अपनी मूल स्थिति में वापस नहीं लौटी हैं। इस बदहाली से शहर के चारों ओर फैली बस्तियों के हजारों नागरिक रोजाना प्रभावित हो रहे हैं।
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चिंताजनक बात यह है कि इतने बड़े पैमाने की समस्या होने के बावजूद आवाज उठाने वाले लोग कम हैं। यही कारण है कि नगर पालिका प्रशासन और भी लापरवाह होता जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि अब उनकी सहनशीलता की सीमा खत्म हो चुकी है और जल्द ही आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
भंडारा बन गया गड्डों का शहर
शहर में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सड़कें पहले ही जर्जर हैं, ऊपर से बढ़ता ट्रैफिक दुर्घटनाओं की संख्या में इजाफा कर रहा है। वर्षों से शहर के सौंदर्यीकरण की योजनाएं भी अधूरी पड़ी हैं। कौन सा क्षेत्र विकसित हुआ और कौन उपेक्षित, इस पर कोई स्पष्ट जवाब संबंधित विभागों से नहीं मिलता।
इस ढुलमुल रवैये ने नागरिकों का आक्रोश और भड़का दिया है। नागरिकों की मांग है कि भूमिगत गटर और जलापूर्ति योजना का काम जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए। शहर की सड़कों की मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित और पूर्ववत स्थिति में लाया जाए। लोगों का साफ कहना है कि अब गड्डों का शहर नहीं, बल्कि सुरक्षित और सुंदर भंडारा चाहिए।
