

Bhandara Solar Subsidy: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ने भंडारा जिले के आम नागरिकों के जीवन में बड़ा आर्थिक बदलाव ला दिया है। घर की छत पर लगाए गए सौर ऊर्जा संयंत्र (रूफटॉप सोलर) के माध्यम से भंडारा परिमंडल के करीब 9,533 उपभोक्ताओं को मई 2026 महीने का बिजली बिल शून्य यूनिट आया है। बिजली के बढ़ते बिलों से छुटकारा और मुफ्त बिजली के इस दोहरे फायदे के कारण यह योजना जिले में अत्यधिक लोकप्रिय हो रही है।केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की शुरुआत की थी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना और अतिरिक्त बिजली उत्पादन होने पर उसे बिजली वितरण कंपनी को बेचकर उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ देना है। अब प्रत्यक्ष क्रियान्वयन से यह सपना सच होता दिख रहा है। महावितरण के आंकड़ों के अनुसार, पूरे भंडारा परिमंडल में कुल 12,334 उपभोक्ताओं ने सौर ऊर्जा संयंत्र चालू किए हैं, जिनमें से 9533 उपभोक्ताओं का बिजली उपयोग शून्य यूनिट दर्ज किया गया है।
सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से सीधे सब्सिडी दी जाती है, जो उपभोक्ताओं के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है। इसके तहत 1 किलोवाट के लिए 30,000 रुपये तक, 2 किलोवाट के लिए 60,000 रुपये तक और 3 किलोवाट या उससे अधिक के लिए 78,000 रुपये तक की निश्चित सब्सिडी दी जाती है। इस वित्तीय मदद के कारण सौर संयंत्र लगाने का खर्च काफी कम हो गया है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह योजना एक बड़ा वरदान साबित हो रही है।
पहले कई उपभोक्ताओं को हर महीने 500 से 1500 रुपये तक बिजली बिल देना पड़ता था, लेकिन अब सोलर पैनल के कारण यह बिल पूरी तरह से बंद हो गया है। साथ ही, जिनके पास बड़ी क्षमता के पैनल हैं, उन्हें ग्रिड में अतिरिक्त बिजली देने के बदले वित्तीय लाभ भी मिल रहा है। आज की तारीख में 9,533 घरों में बिजली बिल शून्य आना भंडारा जिले की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। महावितरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक जानकारी के लिए स्थानीय कार्यालय या आधिकारिक पीएम सूर्यघर पोर्टल पर संपर्क करें।
अधीक्षक अभियंता राजेंद्र गिरी ने कहा कि सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ने के कारण उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य पर आ गया है, यह एक बड़ी सफलता है। इससे न केवल बिजली बिल की बचत हो रही है, बल्कि उपभोक्ता अब खुद बिजली उत्पादक बन गए हैं। अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जमा करके कई उपभोक्ता आर्थिक बचत कर रहे हैं। योजना का लाभ उठाने के लिए पंजीकरण और तकनीकी प्रक्रिया के बारे में अधिक जागरूकता पैदा की जा रही है।