भंडारा जिले में धान खरीदी की अवधि दो माह बढ़ी, भुगतान संकट गहराया; 83 हजार किसानों के 750 करोड़ रुपये अटके

Bhandara Agriculture: भंडारा जिले में धान खरीदी की अवधि दो माह बढ़ने के बावजूद 83 हजार किसानों का करीब 750 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है, जिससे किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
Bhandara paddy procurement crisis
pending farmer payments (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bhandara Paddy Procurement Crisis: खरीफ मौसम के तहत शासकीय समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अवधि भले ही 31 मार्च तक निर्धारित की गई है, लेकिन भंडारा जिले में बीते पंद्रह दिनों से अधिकांश खरीदी केंद्रों पर धान खरीदी पूरी तरह ठप पड़ी है। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा नई खरीदी लिमिट जारी न किया जाना है। अब तक दी गई लिमिट के अनुसार निर्धारित मात्रा का धान पहले ही खरीदा जा चुका है।

नई लिमिट नहीं मिलने से आगे खरीदी होगी या नहीं, इस पर भी असमंजस बना हुआ है। इसी कारण जिला मार्केटिंग फेडरेशन के कई खरीदी केंद्र बंद पड़े हैं। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। जिन किसानों का धान अब तक नहीं बिका है, वह घरों में पड़ा खराब हो रहा है। कहीं तेज गर्मी के कारण धान सूख रहा है, जिससे वजन घटने की आशंका है और किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

धान पंजीकरण की अवधि समाप्त हो चुकी

इसी बीच 31 जनवरी को धान पंजीकरण की अवधि समाप्त हो चुकी है। अब इसके आगे बढ़ने की संभावना भी कम बताई जा रही है। जिले में अब तक 83 हजार से अधिक किसानों से लगभग 750 करोड़ रुपये मूल्य का धान खरीदा जा चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि चार माह बीत जाने के बावजूद एक भी किसान को भुगतान नहीं मिला है। किसानों के खातों में अब तक एक रुपया भी जमा नहीं हुआ है। इसके अलावा इस वर्ष धान पर मिलने वाले बोनस को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

बोनस को लेकर बढ़ी चिंता

बोनस के लिए लाखों किसान पात्र बताए जा रहे हैं, लेकिन जब मुख्य भुगतान के लिए ही सरकार के पास निधि नहीं है, तब बोनस की घोषणा और वितरण की उम्मीद भी कमजोर होती जा रही है। इससे धान उत्पादक किसानों की चिंता और असमंजस और गहराता जा रहा है।

शासन ने अब तक तीन बार जिला मार्केटिंग फेडरेशन का धान खरीदी लक्ष्य बढ़ाया है, लेकिन पिछले चार महीनों में भुगतान के लिए एक बार भी निधि जारी नहीं की गई है। बीते आठ से दस वर्षों में यह पहली बार है जब धान खरीदी का भुगतान इतनी लंबी अवधि तक अटका हुआ है। इसका असर अब रबी फसल पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

किसान आर्थिक संकट में

  • मार्केटिंग फेडरेशन को धान बेच चुके 83 हजार से अधिक किसान भुगतान न मिलने से गंभीर आर्थिक संकट में हैं।
  • रबी सीजन के लिए मजदूरी, बीज और खाद की जरूरत है, लेकिन नकदी के अभाव में उन्हें उधार लेना पड़ रहा है।
  • किसानों का आरोप है कि शासन जानबूझकर भुगतान में देरी कर रहा है और समय टालने की नीति अपना रहा है।
  • यदि जल्द ही नई खरीदी लिमिट और भुगतान की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में किसानों का आक्रोश और तेज होने की संभावना है।