भंडारा में विकास की कीमत पर हरियाली; फोरलेन के लिए 150 साल पुराने पेड़ों की कटाई, आंदोलन की चेतावनी
Bhandara News: भंडारा-मुजबी मार्ग पर फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 150 वर्ष पुराने वृक्षों की कटाई की जा रही है। इससे पर्यावरण और छोटे व्यवसायियों को हो रहे नुकसान के खिलाफ नागरिकों में भारी आक्रोश है।
Bhandara National Highway Authority: भंडारा एक ओर सरकार एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियानों के जरिए वृक्षारोपण का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर भंडारा शहर में विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई की जा रही है। भंडारामुजबीबेला मार्ग पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा चल रहे फोरलेन चौड़ीकरण कार्य के लिए 100 से 150 वर्ष पुराने विशाल वृक्षों को काटा जा रहा है, जिससे नागरिकों में रोष है।
भंडारा से कारधा मार्ग के बीच वर्षों से छाया देने वाले पीपल, बरगद, शीशम और नीम के लगभग 150 से अधिक पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। कारधा से मुजबी के 9 किमी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कटाई के बाद अब भंडारा शहर की हरियाली पर भी संकट गहरा गया है। इस वृक्ष कटाई से केवल पर्यावरण को नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि इन पेड़ों की छाया में अपना रोजगार चलाने वाले छोटे व्यवसायियों पर भी असर पड़ा है।
चाय दुकानदार, फल विक्रेता और अन्य कामगार अब खुले में काम करने को मजबूर हैं, जिससे उनके रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि तकनीकी विकल्पों के जरिए इन पेड़ों को बचाया जा सकता था, लेकिन जल्दबाजी में ऐसा नहीं किया गया। नागरिकों ने मांग की है कि जितने पेड़ काटे गए हैं, उनके बदले कम से कम चार गुना बड़े 10 से 15 फीट ऊंचाई वाले पेड़ लगाए जाएं और उनका समुचित संरक्षण किया जाए।
सम्बंधित ख़बरें
मुंबई कि मीठी नदी की गटर गंगा? मनसे के यशवंत किल्लेदार का प्रशासन से सवाल
कल्याण रूट के यात्रियों की टेंशन खत्म! ₹2,782 करोड़ की पनवेल-कर्जत रेल परियोजना लगभग पूरी, जल्द दौड़ेंगी लोकल
Viksit Bharat 2047: पीयूष गोयल ने मुंबई में की AI आधारित रोजगार पहल शुरू; बोले युवा संभालें देश का नेतृत्व
राज ठाकरे के बैलट नहीं तो चुनाव का बहिष्कार पर सुप्रिया सुले का समर्थन, क्या चुनाव का बहिष्कार करेगा विपक्ष?
नागरिकों ने दी चेतावनी
नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा वृक्षारोपण और संरक्षण की ठोस योजना नहीं बनाई गई, तो आने वाले समय में आंदोलन किया जाएगा। हालांकि सड़क चौड़ीकरण से यातायात सुगम होगा, लेकिन प्राकृतिक ऑक्सीजन देने वाले इन पुराने पेड़ों की जगह कंक्रीट के ढांचे नहीं ले सकते। अब तक 80 से 90 पेड़ काटे जा चुके हैं और लगभग 70 पेड़ और कटाई के लिए चिन्हित हैं, जिससे भविष्य में पर्यावरणीय संकट की आशंका जताई जा रही है।
