भंडारा नगरपालिका में सियासी संग्राम: विकास कार्यों पर भाजपा-शिवसेना आमने-सामने, समर्थन वापसी की चेतावनी

BJP Bhandara Politics: भंडारा नगरपालिका में शिवसेना ने भाजपा पर विकास कार्यों में बाधा डालने और राजनीतिक द्वेष का आरोप लगाया है। शिवसेना ने 2 महीने के भीतर ही समर्थन वापसी की चेतावनी दी है।
In Bhandara, Shiv Sena (Shinde faction) threatens to withdraw support from BJP in the municipality, alleging discrimination in development funds and stalled city projects.
Bhandara Municipal Council (फोटो- सोशल मीडिया)
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Bhandara Municipal Council News: भंडारा स्थानीय नगरपालिका की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब सत्ता में साझीदार शिवसेना (शिंदे गुट) ने अपनी ही सहयोगी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नगर पालिका में भाजपा के स्पष्ट बहुमत के बावजूद शिवसेना के पांच पार्षदों ने विकास के मुद्दे पर बिना शर्त समर्थन दिया था, लेकिन मात्र दो महीने के भीतर ही दोनों दलों के बीच का अंतर्विरोध सड़कों पर आ गया है।

शिवसेना ने पत्र परिषद में दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि विकास कार्यों में बाधा डाली गई, तो वे समर्थन वापस लेकर सक्षम विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। इस समय शिवसेना के गटनेता राजेश धुर्वे, विनयमोहन पशिने, लक्ष्मी भागवत, पूजा कुंभलकर, उमा घोगरे और उषा नंदनवार ने अपनी भूमिका स्पष्ट की।

विकास विरोधी नीतियां जारी रहीं तो हम चुप नहीं बैठेंगे

शिवसेना नेताओं का आरोप है कि विधायक नरेंद्र भोंडेकर के प्रयासों से शहर के विकास के लिए 700 करोड़ रुपये के कार्य मंजूर किए गए थे, जिसमें से लगभग 25 से 35 प्रतिशत निधि उपलब्ध भी हो चुकी है। इसके बावजूद सत्ताधारी भाजपा राजनीतिक द्वेष के चलते इन कार्यों को आगे बढ़ने से रोक रही है। पार्षदों ने कहा कि हमने शहर के सर्वांगीण विकास के लिए भाजपा का साथ दिया था, लेकिन अगर विकास विरोधी नीतियां जारी रहीं तो हम चुप नहीं बैठेंगे। शिवसेना ने शहर की बदहाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

सड़कों की नहीं हो रही मरम्मत

भंडारा पार्षदों के अनुसार 250 करोड़ की भूमिगत गटर योजना के लिए शहर की सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है और उनकी मरम्मत नहीं की जा रही है। इसके अलावा 175 करोड़ के आंतरिक सड़क निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम ठप पड़े हैं। शहीद स्मारक, खांब तालाब, सागर तालाब और मिस्किन टैंक के सौंदर्याकरण का कार्य भी बंद है।

नाट्यगृह के निर्माण में भी धांधली का आरोप लगाते हुए कहा गया कि सीटों की संख्या कम की जा रही है जबकि पूरी निधि निकालने की तैयारी है। इसके साथ ही शिवसेना ने आरोप लगाया कि जिला नियोजन समिति (डीपीसी) की निधि का वितरण करते समय केवल भाजपा पार्षदों को प्राथमिकता दी जा रही है और अन्य दलों के पार्षदों की अनदेखी की जा रही है।

विधायक भोंडेकर की गरीबों के लिए शव । जलाने मुफ्त लकड़ी उपलब्ध कराने जैसी जनहितैषी योजनाओं को भी बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। शिवसेना ने स्पष्ट किया कि यदि सत्ताधारी पक्ष ने निधि वितरण में भेदभाव और विकास विरोधी रवैया नहीं बदला, तो वे जल्द ही समर्थन वापस लेने पर कड़ा फैसला लेंगे।

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