Bhandara Gulf War Impact News: खाड़ी देशों में बनी युद्ध जैसी स्थिति का सीधा असर स्थानीय बाजारों और आम जनता की जेब पर पड़ता दिखाई दे रहा है। खासकर खाद्य तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी से लोगों का मासिक बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
आखाती देशों में तनाव के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसका असर ईंधन, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के साथ-साथ खाद्य तेल पर भी पड़ा है। भारत में करीब 65 प्रतिशत खाद्य तेल आयात किया जाता है, लेकिन युद्ध के कारण पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे बाजार में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।
तेल की कीमतों में 10 से 20 रुपये तक बढ़ोतरी खाद्य तेल के दाम में प्रति किलो और प्रति लीटर 10 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बढ़ी हुई कीमतों पर तेल की बिक्री हो रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। जिले के कुछ खुदरा विक्रेताओं द्वारा भी युद्ध का हवाला देकर कीमतें बढ़ाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं ने प्रशासन से इस पर नियंत्रण की मांग की है।
कम वजन के पैकेट से दाम नियंत्रण का दिखावाशेंगदाना, सोयाबीन और राइस ब्रान तेल जैसे विभिन्न प्रकार के खाद्य तेल पैकेट में बड़ी मात्रा में बिकते हैं। पहले जहां एक लीटर के पैकेट मिलते थे, वहीं अब कई कंपनियों ने कीमत समान रखते हुए पैकेट का वजन घटाकर 700 से 800 मिलीलीटर कर दिया है। यह कदम ग्राहकों को बढ़ती कीमतों का एहसास न होने देने के लिए उठाया गया है।
किसानों की दोहरी मारखाद्य तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। सोयाबीन तेल के दाम बढ़े हैं, लेकिन सोयाबीन के दाम में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई। वर्तमान में सोयाबीन का भाव 4800 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है, जो उत्पादन लागत के हिसाब से किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
एक ओर तेल के दाम बढ़ रहे हैं, वहीं निर्यात प्रभावित होने से कृषि उपज के भाव दबाव में हैं, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने आम नागरिकों और किसानों दोनों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा कर दी है।