

Bhandara Gondia Tribal Students Protest: महाराष्ट्र में जारी आदिवासी छात्र आंदोलन ने नागपुर में फिर जोर पकड़ा जब अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के भंडारा जिलाध्यक्ष विनोद वट्टी और उनकी विशेषज्ञ टीम के मार्गदर्शन में भंडारा, गोंदिया और वर्धा के छात्र संगठनों ने आंदोलन को दोबारा शुरू किया। सरकारी दबाव के बीच आंदोलन स्थगित कर दिया गया था, लेकिन छात्रों का संघर्ष जारी रहा। आंदोलन शुरू होते ही आदिवासी विकास विभाग के अपर आयुक्त कार्यालय में भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया।
बैरिकेडिंग कर प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए गए तथा आने-जाने वालों से पूछताछ की गई। अपने ही विभाग के कार्यालय में प्रवेश से छात्रों को रोकने पर आंदोलनकारियों में तीव्र आक्रोश फैल गया। आंदोलन के दौरान ट्विंकल भोयर, साधना नरेश भोयर, सिमरन महेश मरसकोल्हे, निशा नाईक और श्रुति वरकड़े की तबीयत बिगड़ गई।
पिछले 10 दिनों से आंदोलन को मार्गदर्शन और समर्थन दे रहे विनोद वट्टी की भूमिका से स्थगन के बाद भी आंदोलन की धार कायम रही। आंदोलन पुनः शुरू कर शासन को संदेश दिया गया कि दमन से आंदोलन रोका जा सकता है, लेकिन आदिवासी छात्रों की आवाज नहीं दबाई जा सकती। अब छात्रों की न्यायसंगत मांगों पर शासन के जवाब की प्रतीक्षा है।
अभा आदिवासी विकास परिषद भंडारा जिलाध्यक्ष विनोद वट्टी ने कहा कि छात्र हटेंगे नहीं बल्कि रात में भी जो जहां है वहीं खुली छत के नीचे सो रहा है। छात्राओं के स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर होने के बावजूद प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की। इसलिए छात्रों का रोष आदिवासी विकास मंत्री और प्रधान सचिव के प्रति है तथा उनके इस्तीफे की मांग कायम है। चर्चा के लिए केवल मुख्यमंत्री के समक्ष जाएंगे। 28 मांगों में कम से कम 7 प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय और शेष पर लिखित सकारात्मक आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।