कर्ज और फसल नुकसान से बढ़ा संकट, भंडारा में 2025 में 44 किसानों ने की आत्महत्या
Bhandara Farmer Suicide Cases: भंडारा जिले में वर्ष 2025 के दौरान 44 किसानों ने आत्महत्या की, जिनमें से केवल 14 मामलों को सहायता के लिए पात्र माना गया और 30 को अयोग्य ठहरा दिया गया।
- Written By: केतकी मोडक
किसान आत्महत्या (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Crop Damaged Due to Useasonal Rain In Bhandara: धान उत्पादक भंडारा जिले के रूप में पहचान रखने वाला भंडारा इन दिनों गंभीर कृषि संकट से जूझ रहा है। कर्ज, फसल नुकसान और प्राकृतिक आपदाओं के दबाव में वर्ष 2025 के दौरान जिले में 44 किसानों ने आत्महत्या कर ली। हालांकि इनमें से केवल 14 मामलों को ही सरकारी सहायता के लिए पात्र माना गया, जबकि 30 मामलों को विभिन्न तकनीकी कारणों से अयोग्य घोषित कर दिया गया।
इससे प्रभावित परिवारों में नाराजगी और निराशा का माहौल है। भंडारा जिला प्रशासन की जांच समिति ने आत्महत्या के मामलों की समीक्षा के बाद 30 परिवारों को सहायता के लिए अयोग्य ठहरा दिया। कर्ज संबंधी दस्तावेजों की कमी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्रुटियां तथा अन्य तकनीकी कारणों को आधार बनाया गया। केवल 14 पात्र परिवारों को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर किसान संगठनों ने सवाल उठाए हैं।
प्राकृतिक आपदाओं ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जिले के 1 लाख 55 हजार 516 किसानों की 61 हजार 140.90 हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई। बेमौसम बारिश, अतिवृष्टि, बाढ़ और तालाबों की मेढ़ टूटने जैसी घटनाओं ने खेती को भारी नुकसान पहुंचाया। अक्टूबर 2025 की बेमौसम बारिश सबसे अधिक विनाशकारी साबित हुई, जिससे 1 लाख 21 हजार 608 किसान प्रभावित हुए। इसी दौरान जुलाई से सितंबर के बीच 15 किसानों ने आत्महत्या की।
सम्बंधित ख़बरें
पुणे में 24 घंटे से बिजली गुल: महावितरण की लापरवाही पर भड़के कात्रज और सुखसागरनगर के नागरिक
PMPML पर आर्थिक संकट गहराया: 1,610 करोड़ खर्च के मुकाबले सिर्फ 818 करोड़ आय, 300 करोड़ की बकाएदारी
अमरावती विश्वविद्यालय की छात्रों को सलाह: प्रतिबंधित 29 कॉलेजों में न लें एडमिशन, विवि नहीं देगा मान्यता!
हमारी पुलिस दिल्ली जैसी नहीं है… अभिनंदन मोर्चे के दौरान राज ठाकरे ने की महाराष्ट्र पुलिस की जमकर तारीफ
सिंचाई सुविधाओं का अभाव
भंडारा धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन जिले के कई हिस्सों में आज भी पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। किसान मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर हैं। लगातार फसल नुकसान, बढ़ते कर्ज, बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर रहा है। इससे खेती का संकट और गहरा होता जा रहा है।
किसान संगठनों ने की निष्पक्ष पुनर्जाच की मांग
किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आत्महत्या के लिए अयोग्य ठहराए गए मामलों की निष्पक्ष पुनर्जाच होनी चाहिए। उनका मानना है कि केवल तकनीकी आधार पर सहायता नकारने के बजाय परिवारों की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार प्रशासन को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावित परिवारों को राहत और न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
यभी पढे़ं:- महाराष्ट्र: प्रफुल पटेल-तटकरे ने फडणवीस से की मुलाकात, सुनेत्रा पवार को वित्त विभाग देने की मांग
5 महीने में एक भी घटना नहीं हुई
भंडारा निवासी उपजिलाधिकारी मनोहर चव्हाण ने कहा कि “सरकारी नियमों के अनुसार मामलों की विधिवत जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही मानदंडों पर खरे उतरने वाले पात्र मामलों में मदद दी जाती है। वर्ष 2025 के 44 मामलों में से 14 परिवारों को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है, जबकि 30 मामले नियमों में न बैठने के कारण अयोग्य रहे। राहत की बात यह है कि पिछले पांच महीनों में जिले में किसान आत्महत्या की एक भी घटना नहीं हुई है।”
