Bhandara Education News: महाराष्ट्र के स्कूलों में छात्रों की संख्या के सत्यापन के लिए शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए आदेश ने हड़कंप मचा दिया है। सत्यापन के दिन ही विशिष्ट विषयों की परीक्षा लेना अनिवार्य करने के निर्णय को शिक्षक संगठनों और छात्रों ने तुगलकी बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक महेश पालकर और प्राथमिक शिक्षा निदेशक शरद गोसावी के हस्ताक्षर से 31 मार्च को यह आदेश जारी किया गया है।क्या है सरकारी आदेशनए नियमों के अनुसार, कक्षा दूसरी से आठवीं तक का सत्यापन परीक्षा मूल्यांकन के दिन होगा।
वहीं, कक्षा नौवीं और ग्यारहवीं का सत्यापन 11, 15 और 22 अप्रैल को किया जाना निश्चित हुआ है। इस सत्यापन के दौरान नौवीं के लिए मराठी, गणित, अंग्रेजी और ग्यारहवीं के लिए मराठी, भौतिकी व अंग्रेजी विषयों के पेपर लेना अनिवार्य कर दिया गया है। परीक्षाएं खत्म, तो अब फिर से पेपर क्योंराज्य के अधिकांश माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों ने वार्षिक योजना के अनुसार अपनी अंतिम सत्र की परीक्षाएं पूरी कर ली हैं। कई कनिष्ठ महाविद्यालयों में ग्यारहवीं के छात्र अब बारहवीं की पढ़ाई शुरू कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में दोबारा तीन विषयों की परीक्षा लेना छात्रों पर भारी मानसिक दबाव डालने वाला साबित होगा।
छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य परीक्षाएं हो चुकी हैं और अब वे पूरी तरह बारहवीं की तैयारी में जुटे हैं, ऐसे में दोबारा परीक्षा देना उनके साथ अन्याय है।शिक्षकों पर काम और आर्थिक बोझशिक्षक संगठनों के अनुसार, उन्हें छात्रों के संख्या सत्यापन से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे परीक्षा के साथ जोड़ना व्यावहारिक नहीं है। नए प्रश्नपत्र तैयार करना, पर्यवेक्षण और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच से स्कूलों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
साथ ही, 22 अप्रैल को आखिरी पेपर लेकर 1 मई को परिणाम घोषित करना तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन होगा।विधायक अडबाले से हस्तक्षेप की मांगशिक्षक विधायक अडबाले के भंडारा दौरे के दौरान विभिन्न शिक्षक संगठनों ने उनसे मुलाकात कर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठनों ने ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट किया है कि सत्यापन और परीक्षा दो अलगअलग प्रक्रियाएं हैं और इन्हें एक साथ नहीं थोपा जाना चाहिए।
परीक्षा में छूट दी जाएछात्रों के संख्या सत्यापन के लिए हमारा पूरा सहयोग रहेगा, लेकिन अधिकांश कॉलेजों में परीक्षाएं समाप्त हो चुकी हैं। अब दोबारा परीक्षा का नियोजन कर परिणाम घोषित करना तर्कसंगत नहीं है। स्थानीय स्कूलों को उनकी वार्षिक योजना के अनुसार परीक्षा लेने की छूट दी जानी चाहिए।विनोद किन्दर्ले, महासचिव, शिक्षक भारती।