भंडारा-गड़चिरोली के बीच बनेगा 94 किमी का 'द्रुतगति महामार्ग', किसानों के विरोध के बावजूद मिली मंजूरी

Bhandara-Gadchiroli 94 km Expressway: भंडारा-गड़चिरोली के बीच 94 किमी लंबा द्रुतगति महामार्ग बनने जा रहा है। विरोध के बाद भी महामार्ग के लिए भूसंपादन सहित 931 करोड़ 15 लाख रुपये व्यय को मंजूरी मिली।
Bhandara-Gadchiroli 94 km Expressway: भंडारा-गड़चिरोली के बीच 94 किमी लंबा द्रुतगति महामार्ग बनने जा रहा है। विरोध के बाद भी महामार्ग के लिए भूसंपादन सहित 931 करोड़ 15 लाख रुपये व्यय को मंजूरी मिली।
भंडारा-गड़चिरोली न्यूज
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Bhandara News: भंडारा से गड़चिरोली के बीच 94 किलोमीटर लंबा प्रवेश नियंत्रित द्रुतगति महामार्ग बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल के माध्यम से इस महामार्ग का निर्माण होगा। भूसंपादन और अन्य कार्यों के लिए 931 करोड़ 15 लाख रुपये का खर्च स्वीकृत किया गया है।

इस मार्ग से दोनों जिलों के बीच संपर्क सुगम होगा और औद्योगिक, व्यापारिक व शैक्षणिक क्षेत्र को गति मिलेगी। लाखांदुर तहसील के मोहरना, खैरना, रोहनी, किरमटी, करांडला, राजनी, सरांडीबु, खैरी, घरतोडा सहित कई गांवों से होकर यह मार्ग गुजरेगा।

परियोजना की विशेषताएं

यह महामार्ग प्रवेश नियंत्रित पद्धति का होगा, जिससे यात्रा तेज, सुरक्षित और समय बचाने वाली होगी। विदर्भ के प्रमुख जिलों को जोड़ने वाला यह मार्ग आगे चलकर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़कर उत्तर और दक्षिण भारत के संपर्क को और सुदृढ़ करेगा। इससे कृषि उत्पाद, वनसंपदा और औद्योगिक माल की त्वरित ढुलाई होगी और स्थानीय बाजार को नया व्यापारिक विस्तार मिलेगा।

किसानों का विरोध

इस परियोजना में बड़े पैमाने पर खेती की ज़मीन अधिग्रहित होने से किसानों में असंतोष है। किसानों का आरोप है कि सरकार ने बिना पूर्व सूचना के जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी और माप-तौल में भी जबरदस्ती की जा रही है। किसानों की मुख्य मांगें प्रति एकड़ 1 करोड़ 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, जमीन गंवाने वाले परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए, किसानों को प्रति माह 30 हजार रुपये पेंशन मिले, खेतों में आवाजाही के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया जाए, वर्षा जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए इस प्रकार हैं। किसानों ने इस मुद्दे पर जनवरी माह में आंदोलन भी किया था।

परियोजना के लाभ

  • तेज़ और सुरक्षित परिवहन - यात्रा का समय कम होगा और सड़क दुर्घटनाएं घटेंगी।
  • औद्योगिक विकास - गडचिरोली की खनिज संपदा, बांस, वन उत्पाद और कृषि उत्पाद शीघ्र बाजार तक पहुंचेंगे।
  • निवेश के अवसर - महामार्ग किनारे औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक पार्क और गोदाम विकसित हो सकेंगे।
  • पर्यटन का विकास - नागझिरा अभयारण्य, कोरची-अहेरी क्षेत्र के प्राकृतिक व धार्मिक पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षण बढ़ेगा।
  • शैक्षणिक व स्वास्थ्य सुविधाएं - ग्रामीण व दूरदराज़ के इलाकों से शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं तक पहुंचना आसान होगा।

खेती और जंगल पर असर

इस परियोजना से बड़ी मात्रा में कृषि भूमि प्रभावित होगी, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा। साथ ही, जंगल क्षेत्र और नदी किनारे से सड़क गुजरने पर पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ सकता है। सरकार को किसानों का विश्वास जीतकर उनकी मांगों का समाधान करना आवश्यक है। विकास की यह योजना तभी सार्थक होगी जब स्थानीय लोगों को न्यायपूर्ण मुआवजा, पुनर्वास और पर्यावरण संरक्षण के ठोस उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

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