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Bhandara News: किसानों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुधन का स्वास्थ्य भंडारा जिले में गंभीर संकट से गुजर रहा है. जिले में कुल 84 पशु चिकित्सालय कागजों पर तो सुचारू रूप से संचालित दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है. इन अस्पतालों में भारी स्टाफ की कमी, आधुनिक उपकरणों का अभाव और दवाओं की कमी के चलते स्थिति बेहद दयनीय हो गई है.
हालात ऐसे हैं कि ये पशु चिकित्सालय खुद ही आईसीयू में पहुंच गए हैं. सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि जिले में लगभग 70 प्रतिशत पशु चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हैं. लंबे समय से रिक्त हैं 56 पद उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 81 स्वीकृत पशु चिकित्सकीय अधिकारियों के पदों में से केवल 25 अधिकारी ही कार्यरत हैं, जबकि 56 पद लंबे समय से खाली हैं.
इसके चलते एकएक डॉक्टर पर औसतन 9 से 12 गांवों की जिम्मेदारी आ जाती है, जिससे समय पर उपचार उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है. कई बार आपातकालीन स्थिति में पशुपालकों को निजी डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ती है, जिससे उनका खर्च भी बढ़ जाता है. पाइंटर… दिया जाता 3 करोड़ का योगदान ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध व्यवसाय किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है.
हर वर्ष करीब 250 से 300 पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाकर जिले की अर्थव्यवस्था में लगभग 3 करोड़ रुपये का योगदान दिया जाता है. हालांकि, उचित जांच सुविधाओं के अभाव में यह व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. एक्सरे, सोनोग्राफी और रक्त परीक्षण जैसी आवश्यक सुविधाएं केवल जिला मुख्यालय तक ही सीमित हैं. लाखांदुर, पवनी, मोहाडी और तुमसर जैसे तहसीलों में इन सुविधाओं का अभाव होने के कारण पशुओं की समय पर जांच नहीं हो पाती.
जिससे उनकी मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है. स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि कई पशु चिकित्सालयों के पास अपनी स्थायी इमारत तक नहीं है. कई अस्पताल आज भी किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं, जिससे डॉक्टरों और कर्मचारियों को सेवा प्रदान करने में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
जिले के सभी पशु चिकित्सालयों को श्रेणी1 में परिवर्तित किया गया है और रिक्त पदों को भरने के लिए शासन स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है.