बीड में पुलिस बनकर किया ‘डिजिटल अरेस्ट’, 23 लाख की ठगी करने वाली पति-पत्नी की जोड़ी समेत 3 गिरफ्तार
Beed Cyber Crime: बीड में पुलिस अधिकारी बनकर एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट की धमकी दे 23.42 लाख रुपये ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश। जालगांव से महिला समेत तीन आरोपियों को पुलिस ने दबोचा।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Beed Digital Arrest Fraud News: महाराष्ट्र के बीड जिले से साइबर अपराध का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह को पुलिस ने धर दबोचा है। इस गिरोह ने परली वैजनाथ के रहने वाले सूर्यकांत मुंडे नामक व्यक्ति को अपना शिकार बनाया और उनसे करीब 23.42 लाख रुपये हड़प लिए। पुलिस ने इस मामले में एक महिला सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
कैसे बुना ठगी का जाल?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रसन्न अजय कसाट (31), उसकी पत्नी स्वाति कसाट (26) और उनके साथी संकेत दीपक बेलदार (22) के रूप में हुई है। ये सभी जलगांव के रहने वाले हैं। पुलिस के अनुसार, इन जालसाजों ने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित सूर्यकांत मुंडे से संपर्क किया। उन्होंने मुंडे को डराया कि वे किसी गंभीर अपराध में संदिग्ध हैं और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ (कैमरे के सामने रहने की मजबूरी) कर दिया गया है। डर और दबाव का फायदा उठाकर आरोपियों ने मुंडे को जेल जाने से बचने का झांसा दिया और उनसे 23.42 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
तकनीकी जांच से हुआ खुलासा
ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बीड पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और बैंक ट्रांजैक्शन की कड़ियों को जोड़ते हुए जालगांव में गिरोह का सुराग लगाया। एक विशेष टीम ने छापेमारी कर तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके पास से 3 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं और उन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है जिनमें ठगी की रकम भेजी गई थी।
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गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
जांच अधिकारी ने बताया कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है जिसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े होने की संभावना है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा की गई अन्य वारदातों का पता लगाया जा सके। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी असली सरकारी विभाग या पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल के जरिए किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट‘ नहीं करता। ऐसे कॉल आने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल (1930) को सूचित करें।
