औरंगाबाद में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर विशेष बैठक, दी ये महत्वपूर्ण सलाह
- Written By: शफीउल्ला हुसैनी
औरंगाबाद: शहर पुलिस आयुक्तालय, औरंगाबाद महानगरपालिका (Aurangabad Municipal Corporation) और जिला परिषद के शिक्षा विभाग (Education Department) की ओर से स्कूल और कॉलेज के छात्राओं (Students) की सुरक्षा पर एक विशेष बैठक शहर के संत एकनाथ रंग मंदिर में डीसीपी अपर्णा गिते के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता दिवानी न्यायाधीश वैशाली फडणीस ने की। बैठक में सभी ने छात्राओं की सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा कर हर स्कूल में सीसीटीवी लगाने के अलावा छात्रों को पराटे बनाना और छात्राओं को कराटे सिखाना समय की जरुरत होने पर जोर दिया।
आरंभ में आम्रपाली तायडे ने बताया कि छात्रा जब स्कूल में आती है, तबसे लेकर स्कूल छुटने तक की जिम्मेदारी स्कूल के मुख्याध्यापक और संपूर्ण स्टॉफ की है। माध्यमिक के शिक्षणाधिकारी मधुकर देशमुख ने स्कूल परिवहन समिति हर स्कूल में क्यों जरुरी है, साथ ही जो बसेस छात्रों को लाते और ले जाते हैं, उन बसों के चालक और मालिक का नबंर रहना जरुरी है।
दी गई संविधान की जानकारी
बैठक में औरंगाबाद महानगरपालिका की उपायुक्त नंदा गायकवाड ने संविधान की जानकारी दी और समाज में समानता आना पर जोर दिया। लड़कियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अभिभावकों की हैं। लडकों और लडकियों ने एक-दूसरे को लेकर आदर करने की सीख अभिभावकों ने सिखानी चाहिए। उन्हें गुड टच तथा बैड टच की शिक्षा हर माता ने देने चाहिए।
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स्कूल में सीसीटीवी लगाना जरुरी
शिक्षण उपसंचालक अनिल साबले ने अपने विचार में कहा कि सैकडों सालों तक समाज सुधारने के लिए समाज सुधारकों ने प्रयास किए। जिसके चलते लड़कियां उच्च शिक्षा हासिल कर नौकरियां कर रही हैं, परंतु कुछ संस्कृतहिन लोगों के चलते लडकियां सुरक्षित नहीं है। इसलिए हर स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगाना जरुरी है। साथ ही लड़कों को पराठे बनाना और लडकियों को कराटे सिखाना जरुरी है। विशेषकर, पोक्सो कानून का ज्ञान स्कूल के हर व्यक्ति होना जरुरी है।
आपात स्थिति के बाद मांगी जाती पुलिस से सहायता
दिवानी न्यायाधीश वैशाली फडणवीस ने कहा कि आपात स्थिति के बाद ही पुलिस से सहायता मांगी जाती है। अपने देश में सहनशीलता और महिला एक समीकरण बना हुआ है। किसी से तकलीफ हो रही है तो वह बात तत्काल सामने आने चाहिए। वह तकलीफ सहन न करते हुए तत्काल पुलिस का दरवाजा खटखटाना चाहिए। छात्राओं को हर स्कूल सुरक्षित लगे, यह जिम्मेदारी हम सबकी है।
घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दें
शहर के डीसीपी शिलवंत नांदेडकर ने अपने विचार में कहा कि किसी के सामने कोई अपराध हो रहा हो अथवा अपराध होने का डर लग रहा है तो तत्काल इसकी जानकारी पुलिस को दें। अपराधी को मदद करने वाले और उसे छुपानेवाले को उतनी ही शिक्षा है, जितनी अपराधी को होती हैं। डीसीपी अपर्णा गिते ने कहा कि पहचान पत्र के बिना छात्र को कॉलेज कैम्पस में प्रवेश ना दें। स्कूल अथवा कॉलेज के गेट पर सुरक्षा रक्षक रखना जरुरी है। साथ ही स्कूल और कॉलेज में आनेवाले हर व्यक्ति का रजिस्टर में पंजीकरण कर रखें क्योंकि कभी भी निकट के रिश्तेदार से ही लड़की को तकलीफ होने का डर रहता है। हर छात्र स्कूल और कॉलेज छुटने के बाद सुरक्षित घर पहुंचे इसकी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है। मंच पर डीसीपी दिपक गिरे, महानगरपालिका के शिक्षणाधिकारी संजीव सोनार, रामनाथ थोरे, भरत तीनगोटे, ज्ञानदेव सांगले उपस्थित थे। बैठक में बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के संचालक, मुख्याध्यापक, शिक्षक उपस्थित थे।
