

Chhatrapati Sambhajinagar Botanical Garden Cidco N8 Water Crisis: छत्रपति संभाजीनगर शहर के सिडको एन-8 स्थित मनपा के बॉटनिकल उद्यान में मुख्य नाले में सीधे दूषित पानी छोड़े जाने का मामला सामने आने के बाद मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। नालों में ड्रेनेज और सीवेज का पानी मिलाने पर प्रतिबंध होने के बावजूद नियमों की अनदेखी किए जाने से नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
हाल ही में मनपा आयुक्त अमोल येड़गे ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर नालों में सीवेज छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मनपा के ही अधीन आने वाले बॉटनिकल उद्यान परिसर में बड़े पाइप के माध्यम से सीधे मुख्य नाले में दूषित पानी छोड़ा जा रहा है। नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन आम लोगों को नियमों का पालन करने की चेतावनी दे रहा है, लेकिन अपने ही विभाग में हो रहे उल्लंघन को नजरअंदाज किया जा रहा है।
बॉटनिकल उद्यान शहर के प्रमुख पर्यटन और मॉर्निंग वॉक स्थलों में गिना जाता है। रोजाना बड़ी संख्या में नागरिक यहां टहलने, जॉगिंग करने और परिवार के साथ घूमने आते हैं। लेकिन नाले में छोड़े जा रहे गंदे पानी के कारण आसपास दुर्गंध फैल रही है, जिससे आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सुबह के समय बदबू इतनी अधिक होती है कि वहां रुकना मुश्किल हो जाता है।
मनपा ने भूमिगत गटर योजना के तहत छत्रपति संभाजीनगर शहर की सीवेज लाइन को एसटीपी प्रोजेक्ट से जोड़कर गंदे पानी के शुद्धिकरण की व्यवस्था बनाई थी। इस योजना का उद्देश्य नालों और प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना था। हालांकि, शहर के कई हिस्सों में अब भी ड्रेनेज लाइनें सीधे नालों से जुड़ी होने के कारण योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
नागरिकों ने मांग की है कि बॉटनिकल उद्यान में हो रहे इस नियम उल्लंघन की तत्काल जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि मनपा अपने ही विभागों में नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं कर पा रही है, तो आम नागरिकों से सख्ती की अपेक्षा करना उचित नहीं है। अब इस मामले में संबंधित विभाग और प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर शहरवासियों की नजर बनी हुई है।