

MSEDCL Negligence Sillod News: छत्रपति संभाजीनगर जिले के सिल्लोड तहसील में मानसून आने से पहले बिजली विभाग द्वारा बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सिल्लोड तहसील के खेतों में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहाँ कई स्थानों पर उच्च दाब (High Tension) की बिजली की तारें जमीन के इतने करीब आ गई हैं कि किसानों के हाथ उन तक आसानी से पहुँच रहे हैं। यह स्थिति न केवल खतरनाक है, बल्कि किसी भी वक्त एक बड़े हादसे का सबब बन सकती है। बावजूद इसके, महावितरण का प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
हर साल गर्मियों में महावितरण 'प्री-मानसून मेंटेनेंस' का ढिंढोरा पीटता है। सरकारी कागजों पर लाइनें साफ की जाती हैं और ढीले तारों को कसा जाता है, लेकिन सिल्लोड के खेतों में झूलते तार और टेढ़े हो चुके खंभे इस दावे की पोल खोल रहे हैं। किसानों का आरोप है कि बड़ी मरम्मत का काम (Major Work) एजेंसियों को दिया जाता है, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदारों के कथित 'गठजोड़' के कारण काम केवल कागजों पर ही सिमट कर रह गया है। वर्तमान में खेत खाली हैं, जिससे काम करना आसान है, लेकिन विभाग जानबूझकर देरी कर रहा है।
सिल्लोड के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था का हाल 'रामभरोसे' है। अधिकृत वायरमैन गाँवों से गायब रहते हैं और पूरा कामकाज 'जीरो' (अनधिकृत) कर्मचारियों के हवाले कर दिया गया है। जब किसान आधिकारिक वायरमैन को फोन करते हैं, तो उन्हें बेशर्मी से इन्हीं निजी लड़कों से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। वहीं, एयर-कंडीशनर वाले केबिन में बैठने वाले वरिष्ठ अधिकारियों का रवैया इतना उपेक्षापूर्ण है कि किसानों का कहना है कि उनसे 'न बोलना ही बेहतर' है।
खेतों में लटकती मौत को लेकर किसान अब महावितरण के चक्कर लगा-लगाकर थक चुके हैं। नागरिकों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या किसी किसान की जान जाने का इंतजार कर रहा है? पसीने की कमाई और जान जोखिम में डालकर काम करने वाले किसानों ने अब चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन झूलते तारों और जर्जर खंभों को नहीं सुधारा गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते जागेगा या फिर हादसे के बाद केवल मुआवजे की घोषणा कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेगा?