

Sanjay Shirsat Slams Uddhav Thackeray: अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण और उसके लिए एकत्र की गई दानराशि को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। उद्धव ठाकरे द्वारा लगाए गए चंदा चोरी और दानराशि के राजनीतिक दुरुपयोग के आरोपों पर अब राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री और छत्रपति संभाजीनगर के पालक मंत्री संजय शिरसाट ने कड़ा रुख अपनाया है। शिरसाट ने ठाकरे के इन दावों को न केवल निराधार बताया है, बल्कि इसे जनता को भ्रमित करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
संजय शिरसाट ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए उद्धव ठाकरे के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि राम मंदिर की दानराशि का उपयोग राजनीतिक दलों में टूट-फूट कराने के लिए किया जा रहा है। शिरसाट ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना केवल राजनीतिक बयानबाजी है। उन्होंने तर्क दिया कि राम मंदिर के लिए दिया गया दान करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है और इसे राजनीति के निचले स्तर पर घसीटना गलत है।
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर शिरसाट ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच एजेंसियां अपना काम मुस्तैदी से कर रही हैं और इस मामले में पहले ही कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए, लेकिन केवल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इस मुद्दे को अलग दिशा देना अनुचित है।
उद्धव ठाकरे द्वारा प्रस्तावित रामरक्षा आंदोलन और हनुमान चालीसा पाठ के आह्वान पर शिरसाट ने तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि यह देखना दिलचस्प है कि जिन लोगों ने पहले इस तरह के आयोजनों का कड़ा विरोध किया था, वे अब राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक कार्यक्रमों का सहारा ले रहे हैं। शिरसाट के अनुसार, यह स्थितियों के अनुसार बदला हुआ राजनीतिक रुख है, जिसका उद्देश्य केवल अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाना है।
राम मंदिर आंदोलन के इतिहास को याद करते हुए संजय शिरसाट ने शिवसेना संस्थापक हिंदूहृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के संघर्ष में बालासाहेब ठाकरे के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। शिरसाट ने विपक्ष को नसीहत दी कि उन्हें तथ्यों के आधार पर चर्चा करनी चाहिए और धार्मिक विषयों को राजनीतिक लाभ का औजार नहीं बनाना चाहिए।
संजय शिरसाट का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में हिंदुत्व की विरासत को लेकर महायुति और ठाकरे गुट के बीच जंग छिड़ी हुई है। जहां एक तरफ ठाकरे गुट चंदा चोरी को मुद्दा बनाकर आक्रामक है, वहीं संजय शिरसाट जैसे नेता इसे आस्था का अपमान और निराधार राजनीति बताकर पलटवार कर रहे हैं। आने वाले समय में यह 'रामरक्षा' आंदोलन और उस पर हो रही यह बयानबाजी महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति को किस ओर ले जाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।