Chhatrapati Sambhajinagar जल योजना को मिली रफ्तार, अंतिम चरण में जांच, 28 किमी तक पहुंचा पानी

Sambhajinagar Water Supply Project: छत्रपति संभाजीनगर में नई जल योजना की मुख्य पाइपलाइन जांच अंतिम चरण में, 28 किमी तक पानी पहुंचा, अब नक्षत्रवाड़ी तक 12 किमी दूरी शेष।
Chhatrapati Sambhajinagar Water Scheme Gains Momentum; Testing Enters Final Phase as Water Reaches 28 km Mark.
Sambhajinagar Jayakwadi Dam Water Supply( Source: Social Media )
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Sambhajinagar Jayakwadi Dam Water Supply: छत्रपति संभाजीनगर नई जलापूर्ति योजना में 2,500 मिमी व्यास की मुख्य जलवाहिनी की जांच अब अंतिम चरण में है। खुशी की बात यह रही कि रविवार को बगैर कोई बाधा पानी सीधे फारोला में मनपा के जलशुद्धिकरण केंद्र तक अर्थात 28 किमी तक पहुंच गया।

अब नक्षत्रवाड़ी पंपगृह तक पानी पहुंचाने सिर्फ 12 किमी दूरी शेष होने से प्रशासन ने अगले चरण पर ध्यान केंद्रित किया है। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की मुख्य अभियंता मनीषा पलांडे ने बताया कि गुड़ी पाड़वा के मुहूर्त पर जायकवाड़ी बांध से सायफन पद्धति से जैकवेल में पानी लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।

जैकवेल पूर्ण भरने के बाद 23 मार्च से मुख्य जलवाहिनी की जांच शुरू की गई। शुरुआती चरण में पंपिंग करते समय कुछ तकनीकी दिक्कतें पेश आने से गत दस दिनों में चार दिन अलग-अलग कारणों के चलते जांच रोकनी पड़ी।

हालांकि, शेष दिनों में पानी 19.50 किमी तक पहुंचाया गया। कौडगांव क्षेत्र में स्क्रोल वॉल्व के काम के चलते दो दिन पंपिंग बंद रखनी पड़ी। काम पूर्ण होने के बाद पंप शुरू किया गया।

3,700 अश्वशक्ति के पंप की सहायता से पानी तेज गति से आगे बढ़ने के बाद महज 34 मिनट में कौड़गांव स्थित स्क्रोल वॉल्व तक पहुंचा। तदुपरांत वह बस स्टैंड तक आग्य।

एक दिन में 9.16 KM दूरी तय

मुख्य अभियंता पलाई ने बताया कि शनिवार की शाम तक जलवाहिनी से पानी 19.84 किमी तक पहुंचा था। रविवार को कोई तकनीकी समस्या नहीं आने से महज 1 घंटे में 9.16 किमी दूरी पाटते हुए पानी सीधे 28 किमी पर फारोला के जलशुद्धिकरण केंद्र में पहुंचने के बाद अधिकारी व कर्मियों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।

गणपति बाप्पा के जयकारों से क्षेत्र गूंज उठा। जलवाहिनी में जमी गंदगी पानी के तेज प्रवाह से बाहर निकली। पलांडे ने कहा कि जायकवाड़ी जैकवेल से नक्षत्रवाड़ी पंप गृह तक जलवाहिनी को कुल 136 मीटर ऊंचाई पार करनी होगी।

फारोला तक के चरण में 60 मीटर ऊचाई तक पहुंचने में सफलता मिली है। शेष 12 किमी दूरी में और 76 मीटर ऊंचाई पार करनी होने से जलवाहिनी का दबाव बढ़ेगा।

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