

Sambhajinagar Municipal Corporation Drama: छत्रपति संभाजीनगर के हडको एन-12 क्षेत्र में कचरा संकलन केंद्र को लेकर उपजा विवाद अब प्रशासनिक साख पर सवाल खड़ा कर रहा है। स्थायी समिति के सभापति ने सरकारी काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ 24 घंटे के भीतर मामला दर्ज करने का कड़ा फरमान सुनाया था, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि पांच दिन (120 घंटे) बीत जाने के बाद भी पुलिसिया कार्रवाई सिफर है।
प्रशासन की इस ढुलमुल नीति से न केवल स्थायी समिति के विशेषाधिकारों का अपमान हो रहा है, बल्कि शहर की सफाई व्यवस्था को बाधित करने वालों के हौसले भी बुलंद हो रहे हैं।
पिछले आठ वर्षों से संचालित इस संकलन केंद्र को लेकर मनपा प्रशासन का दावा बेहद स्पष्ट है। घनकचरा विभाग के प्रमुख उपायुक्त नंदकिशोर भोंबे के अनुसार, यहाँ कचरा केवल अस्थायी रूप से जमा किया जाता है और उसे तुरंत मुख्य डिपो तक भेज दिया जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों को दुर्गंध या गंदगी की कोई समस्या नहीं होती। इसके बावजूद, MIM (एमआईएम) के पदाधिकारियों द्वारा किया गया तीखा आंदोलन चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि इस आंदोलन की वजह से कचरा संकलन की प्रक्रिया घंटों बाधित रही, जिससे शहर की स्वच्छता चेन पर बुरा असर पड़ा।
स्थायी समिति की बैठक में इस मुद्दे पर जमकर गर्मागर्मी देखी गई। जहाँ एक ओर राज गौरव वानखेडे और सुरेंद्र कुलकर्णी ने सरकारी काम में रोड़ा अटकाने के आरोप में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की, वहीं एमआईएम के पार्षद खान अब्दुल मतीन और अजहर पठाण ने आंदोलन का बचाव किया। एमआईएम खेमे का तर्क है कि वे जनता की आवाज उठा रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे विकास कार्यों में जानबूझकर डाली गई बाधा मान रहा है। सभापति अनिल मकरिये के आदेश के बावजूद कार्रवाई का न होना अब सत्ता और विपक्ष के बीच एक नए 'पॉलिटिकल ड्रामा' को जन्म दे रहा है।
स्थायी समिति के सभापति अनिल मकरिये ने दोबारा स्पष्ट किया है कि समिति के आदेश सर्वोपरि हैं और कार्रवाई होकर रहेगी। हालांकि, वर्तमान में "विस्तृत जांच जारी है" का हवाला देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जब सरकारी कार्य में बाधा डालने के वीडियो और सबूत मौजूद हैं, तो फिर 24 घंटे का आदेश पांच दिनों तक क्यों खिंच गया? क्या पार्षदों के आपसी टकराव और राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन कदम पीछे खींच रहा है? इस देरी ने हडको क्षेत्र के नागरिकों और मनपा के कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।