संभाजीनगर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और बढ़ती कीमतों पर उबाठा का अनोखा प्रदर्शन, बैलगाड़ी से पहुंचे मनपा

Sambhajinagar Fuel Shortage: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और किल्लत के खिलाफ छत्रपति संभाजीनगर में ठाकरे गुट के नगरसेवकों ने बैलगाड़ी से मनपा पहुंचकर सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।
Thackeray faction corporators in Sambhajinagar staged a unique protest by arriving at the civic body on bullock carts against rising fuel prices and shortage.
संभाजीनगर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sambhajinagar Fuel Shortage Shiv Sena Protest: छत्रपति संभाजीनगर देश में किसानों को खेती और बुआई के लिए डीजल उपलब्ध नहीं होने तथा पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के विरोध में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नगरसेवकों ने बुधवार को अनोखा आंदोलन किया नगरसेवक बैल गाड़ियों में सवार होकर महानगरपालिका की आम सभा में पहुंचे और राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

भडकल गेट से तीन बैल गाड़ियों में सवार होकर उबाठा के मनपा में नेता गणेश लोखंडे, पूर्व महापौर रशीद मामू, सचिन खैरे, हनुमान शिंदे, सुनीता सोनवणे, सावित्रीबाई वाणी और वैशाली कोरडे सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता महानगरपालिका की ओर रवाना हुए।

इस दौरान जय भवानी जय शिवाजी, शिवसेना जिंदाबाद, उद्धव ठाकरे का विजय हो तथा ईंधन संकट पैदा करने वाली सरकार का विरोध हो जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। महानगरपालिका के मुख्य प्रवेशद्वार पर पुलिस ने बैल गाड़ियों को रोक दिया, जिसके बाद पुलिस और शिवसेना नगरसेवकों के बीच कुछ देर तक तीखी बहस भी हुई। बाद में नगरसेवक बैलगाड़ियों से उतरकर सभा कक्ष में पहुंचे।

सड़क पर उतरे नगरसेवक

नगरसेवकों का कहना था कि पिछले एक सप्ताह में पेट्रोल और डीजल के दामों में दो बार वृद्धि हुई है। वहीं पिछले दो दिनों से शहर और जिले के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन उपलब्ध नहीं है। कई पेट्रोल पंपों पर "नो स्टॉक" के बोर्ड लगाए गए हैं, जिससे किसानों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिवसेना नेता गणेश लोखंडे ने कहा कि किसान देश का अन्नदाता है, लेकिन उसे खेती के लिए डीजल तक नहीं मिल रहा।

ऐसे समय में शिवसेना किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन बचत का आह्वान किया है, उसी के विरोध में यह प्रतीकात्मक आंदोलन किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार खुद भी खर्चों में कटौती और बचत करने को तैयार है।

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