सौर ऊर्जा से मिलेगी राहत: 125 करोड़ का बिजली खर्च बचाने के लिए मनपा का ‘सोलर मास्टरस्ट्रोक
Solar Power Project Update: नई जलापूर्ति योजना के कारण बढ़ने वाले 125 करोड़ के बिजली बिल को कम करने के लिए संभाजीनगर मनपा 350 एकड़ में सौर परियोजना लगाएगी। जानें क्या है कमिश्नर अमोल येड़गे की योजना।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सोलर पॅनल (सोशल मीडिया)
Solar Power Project: छत्रपति संभाजीनगर की नई जलापूर्ति योजना शहर के लिए वरदान तो है, लेकिन यह मनपा की तिजोरी पर भारी पड़ने वाली है। योजना के पूरी क्षमता से शुरू होने पर बिजली का सालाना खर्च 100 से 125 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस वित्तीय बोझ को नियंत्रित करने के लिए आयुक्त अमोल येड़गे ने न्यूनतम 100 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने का निर्णय लिया है। अगले दो सप्ताह में इस प्रोजेक्ट पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है, जो मनपा के इतिहास में ऊर्जा बचत का सबसे बड़ा कदम होगा।
350 एकड़ जमीन की तलाश और कार्यान्वयन
100 मेगावाट की इस विशाल परियोजना को साकार करने के लिए लगभग 350 एकड़ से अधिक जमीन की आवश्यकता है। तकनीकी गणना के अनुसार, एक मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन लगती है। प्रशासन फिलहाल बड़े भूखंड वाली सरकारी जमीन की खोज कर रहा है। यदि सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होती है, तो निजी जमीन को लीज (पट्टे) पर लेने का विकल्प भी खुला रखा गया है। आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि सौर परियोजना का क्रियान्वयन नई जल योजना के चरणों के साथ तालमेल बिठाकर किया जाएगा।
नई जल योजना और स्मार्ट मीटरिंग का भविष्य
छत्रपति संभाजीनगर की नई जल योजना का पहला चरण अगले डेढ़ से दो महीने में शुरू होने की उम्मीद है, जबकि पूरी योजना को सुचारू होने में एक से डेढ़ साल का समय लगेगा। इसके साथ ही, मनपा ने 550 करोड़ रुपये का स्मार्ट वॉटर मीटर प्रस्ताव पुनः राज्य सरकार को भेजने की तैयारी की है। यह योजना शुरुआत में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लागू होगी और बाद में आवासीय क्षेत्रों में। इसका उद्देश्य पानी की बर्बादी रोकना और सटीक बिलिंग सुनिश्चित करना है, जिससे मनपा के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
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भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियां और बैठक
सौर परियोजना और नई जल योजना को पटरी पर लाना प्रशासन के लिए एक कड़ी परीक्षा है। एक ओर जहाँ बिजली खर्च को शून्य करने का लक्ष्य है, वहीं दूसरी ओर एक साथ इतनी बड़ी जमीन जुटाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस संबंध में शीघ्र ही एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर चर्चा होगी। यदि यह सौर प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो छत्रपति संभाजीनगर महाराष्ट्र का ऐसा प्रमुख शहर बन जाएगा जो अपनी जलापूर्ति के लिए ‘ग्रीन एनर्जी’ का उपयोग कर करोड़ों रुपये की बचत करेगा।
