Sambhajinagar Hasul Talab Accident( Source: Social Media )
Sambhajinagar Hasul Talab Accident: छत्रपति संभाजीनगर शहर के हसूल तालाब क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गई है। करीब 375 एकड़ में फैले इस विशाल जलाशय की निगरानी के लिए केवल तीन सुरक्षा रक्षक तैनात हैं, जिसके चलते यहां दुर्घटनाओं व आत्महत्याओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
हाल ही में एक घंटे के भीतर चार लोगों की मौत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। जामुनबन क्षेत्र के तीन युवक, जिन्हें तैरना नहीं आता था, तालाब में उतर गए व डूबने से उनकी मौत हो गई।
इसी दौरान एक अन्य युवक ने करीब 24 फीट गहरे पानी में कूदकर आत्महत्या कर ली। लगातार हुई इन चार मौतों से नागरिकों में भय व आक्रोश का माहौल है। इतने बड़े क्षेत्र में केवल तीन गार्ड होने के कारण पूरी निगरानी संभव नहीं हो पा रही है।
कई स्थानों पर सुरक्षा जालियां टूटी हुई हैं, जबकि कुछ हिस्से पूरी तरह खुले हैं, जिससे लोग आसानी से अंदर प्रवेश कर लेते हैं। कई युवक चेतावनी के बावजूद तालाब में उतरते हैं व जोखिम भरे कदम उठाते हैं।
तालाब के चारों ओर बनी दीवारों पर भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। लोग दीवारों पर चढ़कर बैठते हैं या सीधे पानी में छलांग लगा देते हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, सुनसान इलाका होने के कारण यह जगह नशा करने वालों का अड्डा भी बनती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हर्सल तालाब क्षेत्र में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करना बेहद जरूरी है। पूरे इलाके में पुख्ता घेराबंदी, आधुनिक निगरानी प्रणाली व पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए, साथ ही अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे चच्चों को ऐसे खतरनाक स्थानों से दूर रखे। लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अब प्रशासन से ठोस व तत्काल कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
सुरक्षा रक्षकों का कहना है कि सीमित स्टाफ के कारण हर व्यक्ति पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है।
कई बार युवक समझाने पर भी नहीं मानते व बहस करते हैं।
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इसके बावजूद रक्षकों ने अब तक 100 से अधिक लोगों की जान बचाने में सफलता हासिल की है।
सीमित उपाय हर घटना के बाद प्रशासन की ओर से सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर वैसी ही हो जाती है।
टूटी जालियों की मरम्मत, मजबूत फेंसिंग व सीसीटीवी जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रही हैं, जिससे नागरिकों में नाराजगी है।