‘अच्छा खाओ, अच्छा बनो’ छात्रों को संतुलित आहार का मंत्र, अधिकारियों का मार्गदर्शन; छात्रों ने ली शपथ

Student Health School Program: छत्रपति संभाजीनगर के एमआईटी हाई स्कूल में आयोजित स्वास्थ्य परामर्श कार्यक्रम में जिलाधिकारी दिलीप स्वामी ने छात्रों को जंक फूड से दूर रहकर संतुलित व पौष्टिक आहार अपनाने
'Eat well, be well' – the mantra of a balanced diet for students, guided by officials; students took a pledge.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar Healthy Lifestyle Campaign: छत्रपति संभाजीनगर शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए संतुलित दिनचर्या व पौष्टिक आहार आवश्यक है। स्वस्थ पीढ़ी ही देश के विकास में योगदान दे सकती है, इसी उद्देश्य से जिलाधिकारी दिलीप स्वामी ने छात्रों को 'अच्छा खाओ, अच्छा बनो' का संदेश दिया।

एमआईटी हाई स्कूल, सिडको एन-4 में 'संस्कार दशसूत्री' के अंतर्गत स्वास्थ्य परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमे जिलाधिकारी स्वामी, मनपा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पारस मंडलेचा व डॉ मेधा जोगदंड ने आहार व स्वास्थ्य के महत्व के बारे में मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम में शिक्षा अधिकारी अश्विनी लाठकर, आईएमए अध्यक्ष डॉ अनुप टाकलकर, डॉ. पूजा करोले, शिक्षा विस्तार अधिकारी मनिषा वाशिंबे, कल्पना पदकोंडे, एमआईटी स्कूल के मुख्याध्यापक संजय वानखेडे, संत मीरा शाला के मुख्याध्यापक अनिल पाटिल, महर्षि स्कूल की मुख्याध्यापिका उषा मालोदे, आनंद विद्या मंदिर के मुख्याध्यापक गणेश मालोदे सहित शिक्षक मौजूद थे।

एकत्रित हुए लगभग एक हजार छात्रों ने स्वास्थ्य संबंधी शपथ ली। स्वामी ने कहा कि उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए छात्रों को आज से ही अपने स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए। आकर्षक पैकिंग में मिलने वाले जंक फूड, फास्ट फूड व कोल्ड ड्रिंक्स हानिकारक हैं। इसके बजाय घर का बना भोजन अधिक पौष्टिक व लाभदायक होता है।

2224 स्कूलों में किया गया स्वास्थ्य परामर्श

इस पहल में अब तक जिले की 2224 स्कूलों में स्वास्थ्य परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें शहर की 475 स्कूलों में 1,02,522 छात्र व 2843 शिक्षक शामिल हुए, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की 1542 स्कूलों में 2,34,708 छात्र व 5312 शिक्षक सहभागी बने।

पिछले दिन शहर की 207 स्कूलों में स्वास्थ्य परामर्श शिविर पूर्ण किए गए कार्यक्रम का परिचय वाशिवे व संचालन कविता रगड़े ने किया तथा वानखेडे ने आभार माना।

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