पर्यटन नगरी की छवि धूमिल, छत्रपति संभाजीनगर में कचरे का संकट, स्वच्छ सर्वेक्षण में टॉप-10 सपना दूर

Sambhajinagar Cleanliness Survey: छत्रपति संभाजीनगर में कचरा प्रबंधन की कमी और नागरिकों की लापरवाही से स्वच्छ सर्वेक्षण में टॉप-10 का लक्ष्य मुश्किल, शहर में रोज 400 टन कचरा जमा।
Image of the 'Tourism City' Tarnished: Garbage Crisis Grips Chhatrapati Sambhajinagar; Top-10 Ranking in 'Swachh Survekshan' Remains a Distant Dream.
Sambhajinagar Waste Management Issue ( Source: Social Media )
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Sambhajinagar Waste Management Issue: छत्रपति संभाजीनगर भले ही मनपा शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण में टॉप-10 में लाने के लिए प्रयासरत है, मगर सड़कों पर लगे कचरे के ढेर व आधा-अधूरा प्रबंधन में इसमें बाधाएं बन रही हैं।

नागरिकों की उदासीनता व जहां-तहां गंदगी फैलाने व कचरा फेंकने की आदत से स्वच्छ सर्वेक्षण में स्थान पाना मनपा के लिए दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। ऐसे में पर्यटन नगरी कब साफ-सुथरा बनेगी, यह सवाल शहर के नागरिक पूछ रहे हैं।

शहर में रोजाना 350 से 400 मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा होता है। इसमें कुछ कचरे का वर्गीकरण करने का दावा भले ही किया जाता है। चिकलथाना, कांचनवाड़ी व हर्सल की परियोजनाओं में गीले कचरे पर प्रक्रिया की जाती है।

कुल कचरे में से आधे से कम क्षेत्र में ही काम होने से वह जहां तहां पड़ा रहता है। शहर की प्रमुख सड़कों, चौराहों व खुली जगहों पर कचरे के ढेर पड़े रहने से दुर्गंध, अस्वच्छता व स्वास्थ्य विषयक समस्याएं बढ़ने से नागरिकों में नाराजगी का आलम है।

संभाजीनगर में अभी भी कचरा वर्गीकरण नहीं

मनपा के बाथी-सीएनजी प्रकल्प, एमआरएफ सेंटर व 'वॉटर प्लस' मानांकन के लिए विविध उपक्रम शुरू किए हैं। हालांकि, इसके अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे। नागरिकों ने दिया पृथक कचरा कर्मियों के संकलन के दौरान पुनः एकत्र किए जाने से पूरी प्रक्रिया बेअसर साबित होती है। इंदौर व सुरत मनधाओं में नागरिकों की ओर से दिया गया कचरा 6 प्रकारों में स्वीकारा जाता है। उसकी अपेक्षा छत्रपति संभाजीनगर में अभी भी कचरा वर्गीकरण की आदत व्यापक प्रमाण में प्रचलित नहीं हुई है।

लघु प्रक्रिया केंद्रों की कार्यक्षमता बढ़ाना जरूरी

सूत्रों ने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण वॉटर प्लस मानांकन हासिल करने के लिए गंदे पानी पर संपूर्ण प्रक्रिया और पुनईस्तेमाल जरूरी है। यही नहीं, शहर में बनाए गए लघु प्रक्रिया केंद्रों की कार्यक्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। तब जाकर हालात सुधरने के आसार है। मनपा की समस्याएं यहां खत्म नहीं हो रहीं, कचरा संकलन व यातायात व्यवस्था में कई खामिया सामने आ रही है। बेंगलुरु स्थित पी गोपीनाथ रेड्डी कंपनी का ठेका रद्द होने के बाद नई कंपनी की ओर से अब काम शुरू नहीं हो पाया है।

जीरो वेस्ट संकल्पना पर अमल जरूरी

हकीकत यह है कि शहर के अधिकांश नागरिक आज भी कचरे के वर्गीकरण को लेकर उदासीन है। वे घर से कचरा गीला व सूखा करके नहीं देते। सार्वजनिक स्थानों पर कबरा फेंक देते हैं।

जीरो वेस्ट संकल्पना नागरिक स्वीकार नहीं कर रहे व और न क्षेत्र साफ-सुथरा रखने के आदी है। मनपा पर समय पर कचरा नहीं उठाने के आरोप लग रहे हैं।

इसके साथ ही संकलन प्रक्रिया में कचरा पुनः मिलाने, इकट्ठा होने वाले कचरा की तुलना में कम प्रक्रिया क्षमता, नागरिकों की ओर से अधूरा वर्गीकरण व प्रबंधन की खामियां जब तक दूर नहीं होगा, तब तक पर्यटन नगरी के साथ सुथरा नहीं बनने की बात जागरूक नागरिक कर रहे है।

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