पीजीआई-डी मूल्यांकन: छत्रपति संभाजीनगर मराठवाड़ा में पहले और राज्य में 5वें स्थान पर, डिजिटल शिक्षा में पीछे

Sambhajinagar News: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के पीजीआई-डी मूल्यांकन में छत्रपति संभाजीनगर 347 अंक पाकर मराठवाड़ा में पहले स्थान पर रहा; स्कूल सुरक्षा में बेहतर पर डिजिटल शिक्षा में सुधार की जरूरत
Chhatrapati Sambhajinagar tops Marathwada and ranks 5th in Maharashtra in the PGI-D evaluation with 347 points, though it lags behind in digital education infrastructure.
शिक्षा मूल्यांकन (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar PGI D Ranking 2026: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी 'जिलास्तरीय शैक्षणिक कामगिरी गुणवत्ता निर्देशांक (पीजीआई-डी) मूल्यांकन में छत्रपति संभाजीनगर जिले ने 600 में से 347 अंक प्राप्त कर मराठवाड़ा में पहला और महाराष्ट्र में पांचवां स्थान हासिल किया है। जिले की इस उपलब्धि की शिक्षा क्षेत्र में सराहना हो रही है, हालांकि रिपोर्ट में डिजिटल शिक्षा व आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता भी बताई गई है।

यह मूल्यांकन विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता, शिक्षकों की संख्या और प्रशिक्षण, स्कूलों की आधारभूत सुविधाएं, स्कूल सुरक्षा तथा डिजिटल शिक्षा जैसे विभिन्न मानकों पर किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार जिले ने 'स्कूल सुरक्षा' श्रेणी में 35 में से 32 अंक हासिल किए, जबकि परीक्षा परिणाम और गुणवत्ता के क्षेत्र में भी प्रभावी प्रदर्शन किया।

दूसरी ओर, डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में जिले को 50 में से केवल 14 अंक मिले। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंप्यूटर लैब, इंटरनेट कनेक्टिविटी और शिक्षण में डिजिटल साधनों के उपयोग के मामले में जिला काफी पीछे है और इस दिशा में बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है। वहीं आधारभूत सुविधाओं में जिले को 51 में से 38 अंक प्राप्त हुए।

हिंगोली को 331 व परभणी को 333 अंक मिले

मराठवाड़ा में छत्रपति संभाजीनगर व जालना दोनों जिले 347 अंकों के साथ संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे। राज्य में सातारा जिला 394 अंकों के साथ शीर्ष पर है। सातारा और छत्रपति संभाजीनगर के बीच 47 अंकों का अंतर मुख्य रूप से डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में है। विभाग के हिंगोली जिले को 331 और परभणी को 333 अंक मिले हैं, जो क्रमशः 15 वें और 13 वें स्थान पर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि शीर्ष श्रेणी तक पहुंचने के लिए अब डिजिटल शिक्षा पर विशेष जोर देना होगा।

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