विश्व मृदा दिवस: कुलपति इंद्र मणि- स्वस्थ शहरों की नींव है स्वस्थ मिट्टी, मिट्टी संरक्षण पर जोर

World Soil Day News: विश्व मृदा दिवस पर परभणी के कृषि विश्वविद्यालय में कुलपति इंद्र मणि बोले स्वस्थ शहरों की नींव स्वस्थ मिट्टी है। विभागीय समन्वय से अनुसंधान खेतों तक ले जाने की अपील की।
World Soil Day
विश्व मृदा दिवस (सौ. सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar World Soil Day News: छत्रपति संभाजीनगर परभणी स्थित वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति इंद्र मणि ने इस वर्ष का नारा 'स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मिट्टी' का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि मृदा का स्वास्थ्य ही शहरों के स्वास्थ्य की नींव है।

उन्होंने सेंद्रिय पदार्थों का उपयोग, कृषि में यांत्रिकीकरण व निविष्ठाओं के संतुलित उपयोग पर जोर देने के साथ ही मृदा विज्ञान, कृषि इंजीनियरिंग व कृषि विद्या विभागों में समन्वय स्थापित कर अनुसंधान को खेत तक पहुंचाने की अपील की।

परभणी स्थित वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान विभाग व भारतीय मृदविज्ञान संस्थान की ओर से विश्व मृदा दिवस पर 'डॉ. डीके पाल स्मृति व्याख्यान' का आयोजन किया गया।

बदलते जलवायु का मृदा के भौतिक गुणों पर प्रभाव' विषय पर प्रस्तुतिकरण

अध्यक्षता कुलपति डॉ. इन्द्र मणि ने ऑनलाइन के जरिए निभाई। प्रमुख अतिथि के रूप में पूर्व कुलपति डॉ.अशोक ढवण, व्याख्याता के रूप में विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. राकेश अहिरे, कुलसचिव संतोष वेणीकर, सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. राहुल रामटेके, पूर्व सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. सैयद इस्माइल मौजूद थे।

कार्यक्रम में ऑनलाइन उपस्थित पूर्व कुलपति डॉ. तपस भट्टाचार्य (बासाकोकृवि, दापोली) ने 'बदलते जलवायु का मृदा के भौतिक गुणों पर प्रभाव' विषय पर प्रस्तुतिकरण किया। यही नहीं, उन्होंने मृदा के प्राकृतिक गुणों को सुरक्षित रखने व कृषि उत्पाद बढ़ाने के लिए अनुसंधान की दिशा भी बताई। डॉ. ढवण ने मृदा विज्ञान के शोधों को किसानों तक सरल व प्रभावी रूप से पहुंचाने के उपाय समझाए।

माटी पूजन व जानकारी पत्रक का विमोचन

  • कार्यक्रम में माटी पूजन किया गया, जिसमें जैविक खाद, हरी खाद, गांडूल खाद, गोबर, लेंडीखत, जल अर्पण कर मातृभूमि के पोषण का प्रतीक दर्शया गया।
  • इस दौरान जमीनी के स्वास्थ्य पर आधारित जानकारी पत्रक का विमोचन करने के बाद डॉ. हरिहर कौसड़ीकर के मार्गदर्शन में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, विश्वविद्यालय प्रवेश द्वार आदि स्थानों पर वितरित किए गए।
  • मंच पर शिक्षा निदेशक डॉ. भगवान आसेवार ने कहा कि माटी ही जीवन की शुरुआत है। भविष्य की खाद्य सुरक्षा, जल संवर्धन व पर्यावरण संतुलन के लिए माटी का स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • उन्होंने डॉ. डीके पाल के योगदान का भी स्मरण कराया, विभाग प्रमुख डॉ. हरिहर कौसडीकर ने भारतीय मृदविज्ञान संस्थान (परभणी शाखा) के उपक्रमों की विस्तृत जानकारी दी।
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