मतिन पटेल संपत्ति तोड़फोड़ मामला: हाई कोर्ट ने मनपा की जल्दबाजी पर उठाए सवाल, पूछा- तड़के क्यों चला बुलडोजर?

Chhatrapati Sambhajinagar: छत्रपति संभाजीनगर में नगरसेवक मतीन पटेल की संपत्ति पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने मनपा प्रशासन को फटकार लगाई है और कार्रवाई की जल्दबाजी पर सवाल उठाए।
The Aurangabad bench of Bombay High Court questioned Chhatrapati Sambhajinagar civic body over its early morning bulldozer action against corporator Matin Patel.
मतिन पटेल संपत्ति तोड़फोड़ मामला (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar Matin Patel Encroachment: नगरसेवक मतीन पटेल की संपत्तियों पर महानगरपालिका द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर शुक्रवार को मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति वैशाली पाटील-जाधव ने मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आश्चर्य व्यक्त किया कि जब अदालत में नियमानुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया था, तब प्रशासन ने इतनी जल्दबाजी में तड़के तोड़‌फोड़ की कार्रवाई क्यों की। मामले में दाखिल तीनों याचिकाओं पर अगली सुनवाई 18 मई को निर्धारित की गई है। यह मामला तथाकथित कॉर्पोरेट जिहाद प्रकरण से जुड़ा हुआ है।

आरोप है कि आरोपी निदा खान को नगरसेवक मतीन पटेल ने अपने यहां आश्रय दिया था। इसी आधार पर मनपा प्रशासन ने 9 मई को मतीन पटेल के निवास, दुकान और लगभग 600 वर्गफुट क्षेत्र में बने कार्यालय को नोटिस जारी की थी। इसके अलावा ब्रिजवाड़ी स्थित प्लॉट क्रमांक 43 के मकान को भी नोटिस भेजी गई थी, जहां निदा खान के ठहरने का दावा किया गया था। नोटिस जारी होने के अगले दिन रविवार की छुट्टी थी।

इसके बाद 11 मई को याचिकाकर्ताओं ने छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका को लिखित आवेदन देकर जवाब प्रस्तुत करने और आवश्यक दस्तावेज देने के लिए 15 दिनों की मोहलत मांगी थी। हालांकि प्रशासन की ओर से संपत्ति गिराने की तैयारी शुरू होने के बाद मतीन पटेल ने 2 अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं, जबकि ब्रिजवाडी संपत्ति के मालिक हनिफ खान, सैयद खान और सैयद सरवर ने अलग याचिका दाखिल की।

12 मई को हुई सुनवाई के दौरान मनपा प्रशासन ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की जाएगी। इसी दिन प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर मकान से सामान हटाने की नोटिस भी जारी की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब नोटिस की अवधि 13 मई दोपहर 12 बजे तक थी, तब प्रशासन ने उससे पहले ही 13 मई की सुबह लगभग पांच बजे बुलडोजर चलाकर संपत्तियां ध्वस्त कर दीं।

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