

MSME For Viksit Bharat 2047 Roundtable Conference: विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने, रोजगार सृजन बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक वातावरण तैयार करने के लिए एमएसएमई क्षेत्र को अधिक सक्षम बनाने की आवश्यकता है। यह मत चैंबर ऑफ मराठवाड़ा इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर (CMIA) के सहयोग से आयोजित 'एमएसएमई फॉर विकसित भारत @2047' गोलमेज परिषद में विशेषज्ञों, उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं ने व्यक्त किया।
छत्रपति संभाजीनगर में गुरुवार को आयोजित इस सम्मेलन में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप उद्यमियों, विशेषज्ञों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों ने विकसित भारत 2047 की दिशा में एमएसएमई क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों, अवसरों तथा आवश्यक नीतिगत सुधारों पर विस्तृत चर्चा की।
'एमएसएमई फॉर 2047' के संस्थापक शांतनु श्रीवास्तव ने कहा कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एमएसएमई क्षेत्र का लगभग एक-तिहाई योगदान है। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में व्यापक प्रगति आवश्यक है, जिसमें एमएसएमई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगी।
उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत देशभर में गोलमेज परिषदों का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर नीतिगत सिफारिशें तैयार कर केंद्र और राज्य सरकारों को प्रस्तुत की जाएंगी तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उद्योग और सरकार के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।
परिषद के संचालक आदित्य पित्ती ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए लगभग 9।2 प्रतिशत की वार्षिक आर्थिक वृद्धि आवश्यक होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एमएसएमई क्षेत्र 10 प्रतिशत से अधिक की विकास दर प्राप्त कर देश की आर्थिक प्रगति में अतिरिक्त योगदान देने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि नियामकीय प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और उद्योग हितैषी बनाया जाना चाहिए। एमएसएमई इकाइयों को अधिक उत्पादक, नवाचार आधारित, निर्यातोन्मुख तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार, उद्योग और नीति निर्माताओं को मिलकर कार्य करना होगा।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से CMIA के उपाध्यक्ष मिहीर सौन्दलगेकर, सीए सोहम कोटक, ऋषिकेश जाजू, ऋषिकेश गवली, राविष सोनी, प्रियांक चोपड़ा, उत्कर्षा पाटील और अनिकेत सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महापौर समीर राजूरकर ने विकसित भारत, विकसित महाराष्ट्र और विकसित छत्रपति संभाजीनगर की परिकल्पना को साकार करने के लिए शहर में प्रस्तावित दीर्घकालिक विकास योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों में आधारभूत संरचना पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जाएगा और शहर के समग्र विकास में उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी। उन्होंने सिटी ट्रांसफॉर्मेशन यूनिट (सीटीयू) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
सीएमआईए के अध्यक्ष अथर्वेशराज नंदावत ने स्वागत भाषण में कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि देशभर में कार्यरत लाखों एमएसएमई इकाइयों की मजबूती से होगा। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा तेजी से औद्योगिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। औरिक औद्योगिक क्षेत्र, विद्युत वाहन निर्माण, विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ते निवेश तथा विकसित होती औद्योगिक व्यवस्था के कारण स्थानीय एमएसएमई उद्योगों के लिए नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परिषद केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उद्योगों की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने का प्रभावी मंच बनेगी।
इसके बाद सीएमआईए के मानद सचिव अजिंक्य सावे ने मराठवाड़ा में नए निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को सहयोग उपलब्ध कराने तथा औद्योगिक विकास को गति देने के लिए चैंबर द्वारा संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन सौरभ छल्लाणी ने किया तथा डॉ. विक्रांत भाले ने आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में मराठवाड़ा क्षेत्र के 60 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
आयोजकों ने बताया कि गोलमेज परिषद के दौरान प्राप्त सभी सुझावों और अनुशंसाओं का संकलन कर केंद्र तथा राज्य सरकार को नीतिगत सिफारिशों के रूप में भेजा जाएगा, ताकि एमएसएमई क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आवश्यक सुधारों को अमल में लाया जा सके।
-नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट