संभाजीनगर: MGM विश्वविद्यालय में 17वें अंतरराष्ट्रीय अंतरविषयक सम्मेलन का का हुआ उद्घाटन
MGM University में 17वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सुरेश प्रभु ने कहा कि वैश्विक सहयोग, बहुविषयक शिक्षा और तकनीक के सही उपयोग से मानवता के लिए बेहतर विश्व का निर्माण संभव है।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
17वें अंतरराष्ट्रीय अंतरविषयक सम्मेलन का उद्घाटन समारोह (सोर्सः फाइल फोटो)
MGM University Conference On Modern Technology In Education: पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा ऋषिहूड विश्वविद्यालय के कुलपति सुरेश प्रभु ने कहा कि दुनिया में सकारात्मक बदलाव केवल किसी एक व्यक्ति, संस्था या विश्वविद्यालय के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए विभिन्न देशों, विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और समाजहित के प्रति जागरूक नागरिकों को समान उद्देश्य के साथ मिलकर कार्य करना होगा। यदि प्रत्येक व्यक्ति मानवता के कल्याण के लिए अपना योगदान दे, तो निश्चित रूप से दुनिया और अधिक सुंदर बन सकती है।
महात्मा गांधी मिशन (MGM) विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 17वें अंतरराष्ट्रीय अंतरविषयक शैक्षणिक सम्मेलन का उद्घाटन शुक्रवार को विश्वविद्यालय के रुक्मिणी सभागार में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।इस अवसर पर सुरेश प्रभु ने उपस्थित प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए बहुविषयक शिक्षा और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
आधुनिक तकनीक के सही उपयोग पर दिया जोर
सुरेश प्रभु ने कहा कि तकनीक का महत्व निर्विवाद है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण उसका सही उपयोग है।भारतीय ज्ञान परंपरा तथा विश्व की विभिन्न पारंपरिक ज्ञान प्रणालियां सदियों के अनुभव और प्रयोगों से विकसित हुई हैं।इनका संरक्षण और प्रसार पूरी मानवता के हित में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समान उद्देश्य से प्रेरित लोगों के सामूहिक प्रयासों से ही बेहतर और सुंदर विश्व का निर्माण संभव है।
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जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति से बनेगा उज्ज्वल भविष्य
केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग की सहसचिव रोहिणी भाजीभाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ीं उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है और उसके पास अपार संभावनाएं हैं।जिज्ञासा, विनम्रता तथा निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवीय मूल्यों का विकल्प नहीं
नॉर्थ बेंगलुरु विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. बी. के. रवि ने कहा कि तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे मानवीय संवेदनाओं और मूल्यों का स्थान नहीं ले सकतीं। उनका उपयोग मानवता और समाज के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।
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नौ विषयों पर होगा गहन मंथन
MGM विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. विलास सपकाल ने बताया कि ‘शैक्षणिक परिवर्तन के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग’ विषय पर आधारित इस दो दिवसीय सम्मेलन में शिक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, प्रबंधन, अभियांत्रिकी और अनुसंधान क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, शोधकर्ता, प्राध्यापक तथा नीति-निर्माता भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान नौ प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा।
कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. आशीष गाडेकर, ब्रिजवॉटर स्टेट विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. जकारी ग्रिफिथ, प्रो. डॉ. मधुसूदन एन. राव, प्रो. उमा शर्मा, प्रो. डायना फॉक्स, प्रो. डॉ. लियू शियांगरोंग, डॉ. महमूद एल-हाशाश, डॉ. विग्नॉन ऊसा तथा डॉ. जेसन एडवर्ड्स सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।
यह सम्मेलन MGM विश्वविद्यालय, ब्रिजवॉटर स्टेट विश्वविद्यालय अमेरिका, हसन द्वितीय विश्वविद्यालय मोरक्को, सिदी मोहम्मद बेन अब्देल्लाह विश्वविद्यालय मोरक्को तथा तफिला टेक्निकल विश्वविद्यालय जॉर्डन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिव कदम और डॉ. जैनब मिनाज ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन उपकुलसचिव डॉ. परमिंदर कौर ने माना।
