दुष्काल से मुक्ति की राह? संसद में गूंजा मराठवाड़ा का जलसंकट, कराड ने मांगा त्वरित समाधान

Marathwada Water Crisis: संसद में डॉ. भागवत कराड ने सह्याद्रि से बहने वाले 100 TMC जल को गोदावरी व कृष्णा बेसिन की ओर मोड़ने का प्रस्ताव रखकर मराठवाड़ा के जलसंकट पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।
A path to freedom from drought? Marathwada's water crisis echoes in Parliament, Karad demands immediate solution
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar Sahyadri Water Diversion: छत्रपति संभाजीनगर देश की सर्वोच्य संसदीय संस्था में मराठवाड़ा के भीषण जलसंकट की गूंज सुनाई दी। संसद में चल रहे बजट सत्र के दौरान सांसद डॉ. भागवत कराड ने शून्यकाल में इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए केंद्र सरकार से ठोस और त्वरित निर्णय की मांग की।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सह्याद्रि पर्वतमाला से प्रतिवर्ष अरब सागर में बहकर जाने वाले अतिरिक्त जल को यदि योजनाबद्ध ढंग से गोदावरी बेसिन की ओर मोड़ा जाए, तो मराठवाड़ा के दुष्काल की तस्वीर बदली जा सकती है।

सांसद डॉ. भागवत कराड ने सदन को अवगत कराया कि सह्याद्रि पर्वतरंगों से लगभग 100 टीएमसी पानी हर वर्ष में समाहित हो जाता है। यदि इस जल का वैज्ञानिक पुनर्विनियोजन कर इसे तथा कृष्णा नदी बेसिन की ओर मोड़ा जाए, तो मराठवाड़ा के लाखों किसानों को स्थायी राहत मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार गिरता भूजल स्तर, सिंचाई के असंतुलित साधन और जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न चरम मौसम स्थितियों ने संकट को और विकराल बना दिया है। उन्होंने दमणगंगा-एकदरे-गोदावरी, दमणगंगा-वैतरणा-गोदावरी तथा नारपार जैसी अंतर-नदीय परियोजनाओं को शीघ्र गति देने की आवश्यकता पर बल दिया।

इन परियोजनाओं के माध्यम से कोंकण क्षेत्र के अतिरिक्त जल को मराठवाड़ा की ओर मोड़ना संभव होगा। इससे सिंचित क्षेत्र में व्यापक विस्तार होगा, कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और औद्योगिक निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

सांसद डॉ. कराड ने उठाया मुद्दा

सांसद डॉ. कराड ने कहा कि मराठवाड़ा की लगभग दो करोड़ आबादी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में जल प्रबंधन केवल विकास का मुद्य नहीं, बल्कि अस्तितव का प्रश्न बन चुका है।

पेयजल संकट से राहत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और रोजगार सूजन के लिए दीर्घकालिक अलसुरक्षा नीति अपनाना समय की मांग है। डॉ. कराड ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि मराठवाड़ा के सर्वांगीण विकास और भावी पीढ़ियों के हित को ध्यान में रखते हुए अरब सागर की और बहने वाले अतिरिक्त जल को गोदावरी बेसिन में मोड़ने संबंधी प्रस्ताव पर सकारात्मक और तात्कालिक निर्णय लिया आए।

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