

Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply Scheme: छत्रपति संभाजीनगर शहर के लिए शुरू की जा रही नई जलापूर्ति योजना के तहत पानी सप्लाई की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण और जीवीपीआर ठेका कंपनी ने मंगलवार को नक्षत्र वाड़ी स्थित जलशुद्धीकरण संयंत्र तक पानी पहुंचाया। हालांकि संयंत्र तक पहुंचा पानी अत्यधिक गंदा और मिट्टी मिश्रित होने के कारण परीक्षण प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो गई। इसके चलते बुधवार से मुख्य पाइपलाइन की दोबारा सफाई करने का निर्णय लिया गया है।
नई जलापूर्ति योजना के पहले चरण में शहर को प्रतिदिन 200 एमएलडी पानी चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 12 जून से शहर में नई योजना के तहत पानी की आपूर्ति शुरू की जानी है। इसी को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण और जीवीपीआर कंपनी ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सोमवार को पंपिंग शुरू कर पूरे दिन कवडगांव तक साथ ही निकासी और नियंत्रण वाल्व की जांच भी की गई। मंगलवार सुबह फिर से पंपिंग शुरू कर पाइपलाइन की सफाई गया। इसके बाद शाम करीब छह बजे नक्षत्र वाड़ी स्थित जलशुद्धीकरण संयंत्र तक पानी पहुंचाया गया।
संयंत्र तक पहुंचा पानी अत्यधिक गंदा पाया गया। पानी में बड़ी मात्रा में मिट्टी और गाद मिश्रित होने के कारण जलशुद्धीकरण संयंत्र में परीक्षण करना संभव नहीं हो सका। अधिकारियों के अनुसार पानी में गंदे पानी का स्तर लगभग 200 एनटीयू पाया गया, जो सामान्य मानकों से काफी अधिक है। इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल पाइपलाइन की दोबारा सफाई करने का निर्णय लिया।
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य पाइपलाइन के कुछ हिस्सों की पूरी तरह सफाई नहीं हो सकी है और पाइपलाइन के भीतर अभी भी मिट्टी जमा है। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण ने बताया कि अब मुख्य पाइपलाइन की दोबारा सफाई कर निकासी और नियंत्रण वाल्वों के माध्यम से पानी छोड़ा जाएगा, ताकि पाइपलाइन में जमा गाद और मिट्टी पूरी तरह बाहर निकाली जा सके। इसके बाद स्वच्छ पानी जलशुद्धीकरण संयंत्र तक पहुंचाकर परीक्षण और प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
छत्रपति संभाजीनगर अधिकारियों ने कहा कि यदि गाद मिश्रित पानी सीधे नए जलशुद्धीकरण संयंत्र में लिया गया, तो संयंत्र के भीतर मौजूद फिल्टर और रेत में मिट्टी जमा हो सकती है। इससे पानी शुद्ध करने की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ संयंत्र के बंद पड़ने का भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसी कारण किसी प्रकार का जोखिम न लेते हुए पहले पाइपलाइन की पूरी सफाई करने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद ही नई योजना के तहत जलशुद्धीकरण और जलापूर्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।