संभाजीनगर की सफाई व्यवस्था पर आर्थिक संकट, कचरा संकलन एजेंसी पर बढ़ा करोड़ों का मासिक बोझ
Waste Management Crisis: संभाजीनगर की निजी कचरा संकलन एजेंसी बढ़ती संचालन लागत और अतिरिक्त कर्मचारियों के वेतन के कारण गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है।
- Written By: अंकिता पटेल
संभाजीनगर, कचरा संकलन, स्वच्छता व्यवस्था,(फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar Waste Agency: छत्रपति संभाजीनगर शहर की स्वच्छता व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की जिम्मेदारी निभा रही निजी कचरा संकलन एजेंसी इन दिनों गंभीर आर्थिक दबाव से जूझ रही है। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी की कार्ययोजना सीमित संसाधनों और निर्धारित मानवबल के आधार पर तैयार की गई थी, लेकिन परिस्थितियां बदलने से संचालन लागत लगातार बढ़ती चली गई।
अतिरिक्त कर्मचारियों का वेतन, नए वाहनों का खर्च और अन्य परिचालन व्यय मिलाकर हर महीने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो एजेंसी के लिए मौजूदा व्यवस्था को उसी स्वरूप में जारी रखना कठिन हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, नई एजेंसी ने कार्यभार संभालने के बाद पहले से कार्यरत कर्मचारियों को समायोजित किया और आवश्यकता के अनुसार नई नियुक्तियां भी कीं। इसके बाद विभिन्न स्तरों से लगातार नए लोगों को रोजगार देने की मांग बढ़ती गई, परिणामस्वरूप कर्मचारियों की संख्या निर्धारित सीमा से काफी अधिक हो गई। न्यूनतम वेतन के नियमों के कारण सभी कर्मचारियों का वेतन भुगतान करना अनिवार्य है, जिससे मासिक व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
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महापौर समीर राजूरकर ने जांच का दिया भरोसा
महापौर समीर राजूरकर ने कहा कि कचरा प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या अनुबंध की शतों से जुड़ा कोई मुद्दा सामने आता है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए महानगरपालिका हर आवश्यक कदम उठाएगी।
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निर्धारित मानवबल 1,700 कर्मचारी।
- वर्तमान कार्यरत कर्मचारी लगभग 2,100।
- अतिरिक्त नियुक्तियां 400 से अधिक।
- लंबित भर्ती की मांग 100 कर्मचारी।
- नए कचरा संकलन वाहन 525।
