देवगिरी किले में तेंदुए का शावक पिंजरे में कैद, दहाड़ती रही मादा तेंदुआ; पर्यटकों की सुरक्षा बढ़ी

Devgiri Fort Leopard: संभाजीनगर के ऐतिहासिक देवगिरी किले में वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में रविवार रात तेंदुए का एक शावक फंस गया। शावक के कैद होने के बाद मादा तेंदुआ इलाके में लगातार दहाड़ती रही।
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मादा तेंदुआ (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Devgiri Fort Leopard Cub Trapped: छत्रपति संभाजीनगर ऐतिहासिक देवगिरी किले के आसपास कई दिनों से तेंदुए की गतिविधियां देखे जाने के बाद वन विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरे में रविवार रात एक तेंदुए का शावक फंस गया। हालांकि, उसके साथ घूम रही मादा तेंदुआ वहां से निकल गई। घटना के बाद वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और पर्यटकों से सतर्क रहने की अपील की है।

जानकारी के अनुसार, पर्यटकों और स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने 11 जुलाई को किले परिसर में पिंजरा लगाया था। रविवार देर रात उसमें तेंदुए का एक शावक कैद हो गया। शावक के फंसने के बाद मादा तेंदुआ काफी देर तक पिंजरे के आसपास मंडराती रही और लगातार दहाड़ती रही, जिससे क्षेत्र में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया।

किले में बढ़ाई गई पर्यटकों की सुरक्षा

सूचना मिलते ही वन विभाग, पुरातत्व विभाग और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में वनकर्मियों की टीम लगातार निगरानी कर रही है। पुलिस ने भी पर्यटकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

वन विभाग के अनुसार, शावक की स्वास्थ्य जांच के लिए विशेषज्ञ दल बुलाया गया है। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसकी स्थिति के अनुसार उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने का निर्णय लिया जाएगा। वहीं मादा तेंदुआ की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।

पर्यटक बरतें सावधानी और न फैलाएं अफवाहें

वन विभाग ने किले के आसपास रहने वाले स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों से शांति बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

चूंकि मादा तेंदुआ अभी भी अपने शावक की तलाश में आसपास के क्षेत्र में सक्रिय हो सकती है, इसलिए वन विभाग की टीम गश्त लगा रही है। प्रशासन ने पर्यटकों को हिदायत दी है कि वे किले के निर्धारित मार्गों पर ही रहें और अकेले या सुनसान जगहों पर जाने से बचें।

– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट

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