मिनी मंत्रालय की जंग शुरू, जिप चुनाव का बिगुल: संभाजीनगर में सत्ता गणित बदलेगा या दोहराव होगा?
Zilla Parishad Election 2026: छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद चुनाव की घोषणा के साथ सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। महायुति में बिखराव के चलते भाजपा के सामने सत्ता बरकरार रखने की कड़ी चुनौती है।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Sambhajinagar Politics: छत्रपति संभाजीनगर मिनी मंत्रालय अर्थात जिला परिषद के चुनाव का बिगुल बजने के बाद जिले में गहमागहमी बढ़ गई है। पिछले चुनाव में सर्वाधिक सीटें मिलने के बावजूद शिवसेना और कांग्रेस के बीच समझौते की राजनीति से वह अध्यक्ष पद से दूर ही रही और यह शीर्ष पद शिवसेना और कांग्रेस ने ढाई ढाई वर्ष साझा किया।
नगरपालिका के बाद मनपा चुनाव में भी महायुति के घटक दलों भाजपा, शिवसेना और राकांपा (अजीत पवार) के बीच बिखराव होने से उनके एकसंघ होने की संभावना कम ही दिख रही है। ऐसे में राज्य व केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को सत्ता बनाए रखने कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा।
जिला परिषद की 62 सीटों के लिए 2017 में हुए आम चुनावों में राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा सर्वाधिक 23 सीटें मिली थीं। शिवसेना को 18, कांग्रेस को 16, अविभाजित राकांपा को 03, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक को एक स्थान मिला था।
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बिड़कीन से निर्वाचित मनसे के एकमात्र सदस्य ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। याद रहे शुरुआत के ढाई वर्ष शिवसेना की एड। देवयानी डोणगांवकर और उसके उसके ढाई वर्ष बाद कांग्रेस की मीना शेलके ने जिप के अध्यक्ष की कमान संभाली थी।
जिला परिषद का कार्यकाल 2020 में खत्म होने के बाद 3 वर्ष 10 महीने प्रशासक राज रहा। अब चुनाव आयोग के घोषित कार्यक्रम के तहत 5 फरवरी को मतदान और 7 फरवरी को मतगणना होगी।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव
पिछले जिला परिषद चुनाव के समय अब्दुल सत्तार कांग्रेस के विधायक थे जिन्होंने भाजपा को सत्ता से वंचित कर कांग्रेस की सत्ता स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी और अपने समर्थकों किशोर बलांडे संग अन्यों को जिप में सभापति पद भी दिलवाया था।
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से नाता तोड़कर अविभाजित शिवसेना में शामिल हुए अब्दुल सत्तार अब शिवसेना शिंदे में हैं। जालना से डॉ. कल्याण काले के सांसद बनने से कांग्रेस को मजबूती मिली है और वह अब्दुल सत्तार संग दोस्ती का लाभ उठाकर अपने समर्थित प्रत्याशियों को ताकत देने की जुगत में हैं।
जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र ठोबरे के नगराध्यक्ष बनने के बाद फुलंब्री और आसपास के क्षेत्रों में उद्धव बाला साहेब ठाकरे पार्टी को लाभ मिलने की संभावना है। कुल मिलाकर नगर पालिका चुनावों में कांग्रेस, राकांपा और यूबीटी को जिले में मिली सफलता के बाद राज्य में सत्तारूढ़ दल उन्हें कम आंकने का साहस नहीं करेंगे। मनपा चुनाव के परिणाम भी मिनी मंत्रालय के परिणाम प्रभावित कर सकते हैं।
पैठण में सबसे अधिक वोटर
| तालुका | मतदाता संख्या |
|---|---|
| छत्रपती संभाजीनगर | 2,95,155 |
| सोयगांव | 87,835 |
| सिल्लोड़ | 2,48,882 |
| कन्नड़ | 2,57,527 |
| फुलंब्री | 1,24,823 |
| खुलताबाद | 85,333 |
| वैजापुर | 2,24,412 |
| गंगापुर | 2,98,726 |
| पैठण | 2,47,824 |
| कुल मतदाता | 18,70,587 |
32 स्थानों पर महिलाएं करेंगी राज
मतदान केंद्रों की संख्या 1,960 से बढ़ाकर 2,396 हुई है।
महिलाओं के लिए सीटें और मतदान केंद्रों की संख्या 32 रहेगी।
शिकायतों का लिया संज्ञान
गत लोकसभा व विधानसभा चुनाव के दौरान एक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या औसतन 1,000 से 1,200 के बीच थी होने से मतदान प्रक्रिया में समय अधिक लगने व लंबी कतारें लगने की शिकायतें मिली थीं।
यह भी पढ़ें:-संभाजीनगर मनपा चुनाव में सियासी संग्राम: अंबादास दानवे का BJP पर वोट खरीदने का आरोप
इसे देखते हुए 2025 के चुनाव में प्रति मतदान केंद्र मतदाताओं की संख्या घटाई गई है। वर्ष 2017 के जिप पंस चुनाव में कुल मतदान केंद्रों का आंकड़ा 1,960 दर्ज किया गया।
