छत्रपति संभाजीनगर: 2740 करोड़ की जलापूर्ति योजना का 'फाइनल काउंटडाउन', एक पंप का बिजली बिल उड़ा देगा होश!

Chhatrapati Sambhajinagar प्यास बुझाने वाली 2740 करोड़ की योजना अंतिम चरण में है। 3500 HP के महाकाय पंपों की टेस्टिंग के लिए बिजली कनेक्शन की तैयारी, जानें क्यों ₹1.40 करोड़ आएगा सिर्फ एक पंप का बिल।
Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply Project
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply Project: छत्रपति संभाजीनगर वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी है! शहर की बहुप्रतीक्षित 2740 करोड़ रुपये की नई जलापूर्ति योजना अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुकी है। पानी उठाव केंद्र (Water Lifting Station) पर विशालकाय पंप स्थापित कर दिए गए हैं। हालांकि, इन पंपों की टेस्टिंग और बिजली के भारी-भरकम बिल ने प्रशासन के सामने एक नई चुनौती पेश की है, जिसके लिए नगर निगम ने 'पैसे बचाने' का खास मास्टरप्लान तैयार किया है।

3500 HP के पंप लगाए गए

योजना के तहत पानी खींचने के लिए 3500 अश्वशक्ति (HP) के दो बेहद शक्तिशाली पंप लगाए गए हैं। इन पंपों की क्षमता इतनी अधिक है कि इनके ट्रायल रन के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका ने महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (MJP) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब पंप पूरी तरह जांच के लिए तैयार हों, तो उसकी 8 दिन पहले लिखित सूचना दी जाए। सूचना मिलने के बाद ही बिजली कनेक्शन जोड़ा जाएगा।

करोड़ों में आएगा बिजली का बिल

प्रशासन की इस सावधानी के पीछे एक बड़ी वित्तीय वजह है। अनुमान लगाया गया है कि जलापूर्ति योजना के एक पंप का मासिक बिजली बिल न्यूनतम 1 करोड़ 40 लाख रुपये तक आ सकता है। अगर बिजली कनेक्शन पहले ही ले लिया जाता है और टेस्टिंग में देरी होती है, तो बिना उपयोग के भी फिक्स्ड चार्ज और अन्य शुल्कों के कारण नगर निगम पर करोड़ों का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसी वित्तीय नुकसान से बचने के लिए 'सूचना मिलने पर ही कनेक्शन' देने का निर्णय लिया गया है।

युद्धस्तर पर जलस्रोतों की सफाई

जहां एक ओर पंपिंग स्टेशन तैयार है, वहीं दूसरी ओर जलस्रोतों की सफाई और मरम्मत का काम भी युद्धस्तर पर जारी है। ठेकेदार कंपनी 'जीडीपीआर' (GDPR) द्वारा पहले चरण के बचे हुए तकनीकी कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पानी की गुणवत्ता और पाइपलाइन के दबाव की जांच करना अनिवार्य है, जिसके लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सबसे अहम कड़ी है।

MJP और मनपा के बीच तालमेल

चूंकि बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी महानगरपालिका की है और तकनीकी क्रियान्वयन महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (MJP) कर रहा है, इसलिए दोनों निकायों के बीच बेहतर समन्वय के लिए '8 दिन का नोटिस' अनिवार्य किया गया है। टेस्टिंग सफल होते ही शहर के उन हिस्सों में पानी की आपूर्ति सुधर जाएगी जो लंबे समय से किल्लत झेल रहे हैं।

2740 करोड़ रुपये की यह मेगा योजना छत्रपति संभाजीनगर के भविष्य के लिए लाइफलाइन मानी जा रही है। भारी बिजली खर्च के बावजूद, प्रशासन का ध्यान इस बात पर है कि बिना किसी तकनीकी खराबी और वित्तीय बर्बादी के जल्द से जल्द शहर के नलों तक पानी पहुँचाया जाए।

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