Chhatrapati Sambhajinagar water crisis (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar Water Crisis: पंपगृहों को नियमित बिजली आपूर्ति न मिलने से छत्रपति संभाजीनगर की जलापूर्ति बार-बार बेपटरी हो रही है। पिछले कुछ महीनों के तकनीकी जायजे में सामने आया है कि 70 प्रतिशत बिजली आपूर्ति बाधित होने तथा जलवाहिनियों में लीकेज के कारण करीब 30 प्रतिशत जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। वर्तमान में शहर में जलापूर्ति का अंतराल 6 से 8 दिनों तक पहुंच गया है, जिससे नागरिकों में हाहाकार मचा हुआ है।
जलापूर्ति विभाग के सूत्रों ने बताया कि जायकवाड़ी बांध से विभिन्न व्यास की जलवाहिनियों के माध्यम से शहरवासियों को पानी उपलब्ध कराया जाता है। 1200 मिमी योजना से प्रतिदिन 80 से 90 एमएलडी, 700 मिमी योजना से 35 से 40 एमएलडी तथा 900 मिमी योजना से 25 एमएलडी पानी मिल रहा है। इस प्रकार कुल उपलब्धता लगभग 140 से 150 एमएलडी है।
कार्यकारी अभियंता वसंत भोये ने बताया कि यदि 900 मिमी योजना पूर्ण क्षमता से संचालित हो, तो 75 एमएलडी तक जल उपलब्ध हो सकता है। हालांकि संबंधित जलशुद्धिकरण केंद्र की क्षमता केवल 25 एमएलडी होने के कारण अतिरिक्त पानी का उपयोग संभव नहीं है। तकनीकी और आर्थिक कारणों से केंद्र की क्षमता बढ़ाना फिलहाल संभव नहीं है, इसलिए सीमित क्षमता में ही नियोजन करना पड़ रहा है।
बिजली बाधित होने से पानी की पंपिंग और शुद्धिकरण प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर वितरण चक्र पर पड़ता है। यदि बिजली आपूर्ति स्थिर रही तो जलापूर्ति का अंतराल और कम किया जा सकता है, अन्यथा यह बढ़ भी सकता है।
भोये ने बताया कि महापौर समीर राजूरकर के निर्देश के बाद जलापूर्ति का अंतर कम करने के लिए संशोधित प्रारूप तैयार किया गया है। इसी के चलते कुछ दिन पहले 8 से 10 दिनों का अंतर घटकर अब 6 से 8 दिनों तक लाने में सफलता मिली है। पंपगृहों को सुचारू बिजली आपूर्ति देना बेहद जरूरी है।
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शहर के लिए प्रस्तावित नई योजना से 200 एमएलडी पानी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह पानी प्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध होने में कम से कम दो महीने लग सकते हैं। बढ़ती आबादी और मांग को देखते हुए उपलब्ध जल के बेहतर नियोजन पर जोर दिया जा रहा है।
जलापूर्ति का 10 से 12 दिनों का गैप कम करने के लिए महापौर समीर राजूरकर ने विस्तृत प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार शहर में रोजाना आने वाले पानी, जलकुंभों की भंडारण क्षमता, चरणबद्ध वितरण, विभिन्न क्षेत्रों को दिए जाने वाले पानी की मात्रा तथा टेल-एंड तक की दूरी का अध्ययन कर नए सिरे से नियोजन किया गया है।