

Sambhajinagar Pre Audit System Change: छत्रपति संभाजीनगर मनपा में विकास कार्यों के भुगतान में हो रही देरी को दूर करने के लिए प्रशासन ने प्री-ऑडिट व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। मनपा आयुक्त अमोल येड़गे ने कहा कि प्री-ऑडिट समाप्त करने संबंधी विस्तृत आदेश अगले दो दिनों में जारी कर दिए जाएंगे।
हालांकि यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं होगी, बल्कि बड़े और महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए एक निर्धारित वित्तीय सीमा तय की जाएगी, जिसके ऊपर के कार्यों की वित्तीय जांच पहले की तरह जारी रहेगी। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार 10 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्यों के बिल लेखा विभाग से लेखा परीक्षण विभाग में भेजे जाते हैं।
जांच पूरी होने के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इससे ठेकेदारों और विभिन्न एजेंसियों के भुगतान में लंबे समय तक देरी होती रही है। इसी कारण जनप्रतिनिधियों और ठेकेदारों की ओर से लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं।
आयुक्त अमोल येड़गे ने स्पष्ट किया कि प्री-ऑडिट प्रणाली पूर्व आयुक्त के आदेश से लागू की गई थी, इसलिए इसे समाप्त करने के लिए नया संशोधित प्रशासनिक आदेश जारी करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आदेश जारी होने के बाद भुगतान प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और सरल होगी, जिससे विकास कार्यों की गति भी बढ़ेगी। हालांकि बड़े वित्तीय मूल्य वाले प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए प्री-ऑडिट की व्यवस्था सीमित रूप में जारी रहेगी।
प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से एक ओर ठेकेदारों को समय पर भुगतान मिलेगा, वहीं दूसरी ओर महत्वपूर्ण परियोजनाओं की वित्तीय जांच भी प्रभावित नहीं होगी। नगर निगम का उद्देश्य विकास कार्यों में अनावश्यक प्रशासनिक देरी को समाप्त कर कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना है।
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बैठक के दौरान आयुक्त अमोल येड़गे ने यह भी स्पष्ट किया कि मनपा में ठेका तर्ज पर कार्यरत कर्मचारियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। वर्तमान में चार एजेंसियों के माध्यम से 2,112 संविदा कर्मचारी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं, लेकिन इसके बावजूद कई विभाग अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग कर रहे हैं। इसे देखते हुए प्रशासन प्रत्येक विभाग से कर्मचारियों की संख्या, कार्य का स्वरूप, प्रदर्शन और वास्तविक आवश्यकता की विस्तृत रिपोर्ट मांगेगा।
समीक्षा के आधार पर जो कर्मचारी कार्य में लापरवाही करते पाए जाएंगे या जिनकी आवश्यकता नहीं होगी, उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया जा सकता है। आयुक्त ने कहा कि मानव संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने और प्रशासनिक खर्च कम करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इससे मनपा की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और दक्ष बनने की उम्मीद है।