

Maharashtra MGNREGA Staff Protest: छत्रपति संभाजीनगर फुलंबी तहसील की 71 ग्राम पंचायतों में कार्यरत 71 ग्राम रोजगार सेवकों का पिछले 10 महीनों से लगभग 50 लाख रुपये का मानदेय सरकारी स्तर पर लंबित है।
इससे इन कर्मचारियों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार की इस उदासीनता के विरोध में ग्राम रोजगार सेवक संगठन ने 1 अप्रैल को 'खुद को जूते मारी' आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
ग्राम रोजगार सेवक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे गांव स्तर पर कार्यों की योजना बनाना, मजदूरों का डेटा संकलन करना व रिपोर्ट तैयार करने जैसी जिम्मेदारियां निभाते हैं।
इसके बावजूद पिछले 10 महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण कई सेवक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, इलाज व रोजमर्रा के खर्च पूरे करना उनके लिए कठिन हो गया है।
फुलंब्री तहसील में ही करीब 49 लाख रुपए का मानदेय बकाया है। लंबे समय से भुगतान न होने के कारण सेवकों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
इस संबंध में संगठन के राज्य प्रचार प्रमुख रईस पटेल ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो 1 अप्रैल को आंदोलन किया जाएगा।
वर्ष 2025 व 2026 के लंबित मानदेय के भुगतान की मांग को लेकर फुलंब्री पंचायत समिति के गटविकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया है। संगठन ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि मांगें नहीं मानी गई तो 1 अप्रैल से आंदोलन को तेज किया जाएगा।