गुलजार-ए-रजा ट्रस्ट घोटाला: फर्जी दस्तावेजों से खुले बैंक खाते; चार ट्रस्टी पर केस दर्ज

Sambhajinagar Crime: संभाजीनगर में गुलजार-ए-रजा ट्रस्ट द्वारा बिना वैध पंजीकरण करोड़ों की दान राशि जुटाकर निजी लाभ में उपयोग करने का खुलासा एटीएस जांच में हुआ। चार आरोपियों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज।
Gulzar-e-Raza Trust scam: Bank accounts opened with forged documents; case registered against four trustees.
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Illegal Donation Collection: छत्रपति संभाजीनगर गुलजार-ए-रजा नामक ट्रस्ट ने धर्मार्थ व धार्मिक कार्यों के नाम पर आम जनता से करोड़ों रुपए की धनराशि एकत्रित करने के बाद निजी लाभ के लिए उसका इस्तेमाल किया गया।

यही नहीं, बिना किसी वैध पंजीकरण के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खोलकर कुल 4 करोड़, 73 लाख 67, 503 रुपए की राशि जमा करने की बात एंटी टेररिज्म स्क्वॉड अर्थात एटीएस की जांच में सामने आई।

प्रकरण में अध्यक्ष इमरान शेख कलीम शेख (38,), उपाध्यक्ष सैयद मुजम्मिल सैयद नूर (34), सचिव अहमदुद्दीन कैसर काजी (38) व ट्रस्टी तौफिक जावेद काजी (43) के खिलाफ माजलगांव - ग्रामीण पुलिस थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।

एटीएस अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर बीड़ जिले में सक्रिय ट्रस्टों व एनजीओ की जानकारी एकत्र की जा रही थी। इसी दौरान गूगल जांच में गुलजार-ए-रजा ट्रस्ट की वेबसाइट व दान के लिए एक्सिस बैंक का खाता नंबर सामने आया।

बैंक स्तर पर की गई जांच में पता चला कि लातूर स्थित मार्केट यार्ड शाखा में ट्रस्ट के नाम से कुल पांच बैंक खाते खोले गए हैं दान की सत्यता की पुष्टि के लिए एटीएस ने हर खाते में 100-100 रुपए की राशि ट्रांसफर की, जो सभी खातों में जमा हुई।

इससे ट्रस्ट के नागरिकों से दान स्वीकारने का खुलासा हुआ। बैंक से प्राप्त केवाईसी दस्तावेजों में ट्रस्ट का पंजीकरण क्रमांक अहमदनगर स्थित फैजान-ए-कंजुल इमान नामक अन्य संस्था का निकला।

दर्पण पोर्टल पर भी फर्जी जानकारी

भारत सरकार के नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण करते समय ट्रस्ट ने 998/2022 पंजीकरण क्रमांक दर्ज किया था। हालांकि, बीड़ जिले के सभी 11 उप-निबंधक कार्यालयों की जांच में ऐसा कोई क्रमांक अस्तित्व में नहीं पाया गया।

बीड के धर्मादाय आयुक्त ने स्पष्ट किया कि गुलजार-ए-रजा ट्रस्ट का उनके कार्यालय में कोई पंजीकरण नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि ट्रस्ट के पैन कार्ड के लिए डीड पंजीकरण दस्तावेजों को ही पंजीकरण प्रमाण-पत्र के रूप में पेश किया गया था।

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