चुनावी ड्यूटी का खामियाजा नागरिकों को, गुंठेवारी प्रस्ताव लटके; सैकड़ों नियमितीकरण आवेदन लंबित

Urban Property: चुनावी ड्यूटी में प्रशासन की व्यस्तता से गुंठेवारी नियमितीकरण के सैकड़ों प्रस्ताव लटक गए हैं। देरी के कारण नागरिकों को कर्ज, कनेक्शन और संपत्ति संबंधी कामों में परेशानी हो रही है।
Citizens bear the brunt of election duty; land regularization proposals stalled; hundreds of regularization applications pending
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Municipal Election Duty Impact: छत्रपति संभाजीनगर चुनावी प्रक्रिया में प्रशासन की व्यस्तता का सीधा असर एक बार फिर आम नागरिकों पर पड़ा है। महानगरपालिका के अधिकारी और कर्मचारी पिछले एक महीने तक चुनाव ड्यूटी में लगे रहने के कारण गुंठेवारी नियमितीकरण से जुड़े सैकड़ों प्रस्ताव लंवित पड़े रहे।

इस देरी ने न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को बाधित किया, बल्कि सैकड़ों परिवारों की रोजमर्रा की परेशानियां भी बढ़ा दीं। शहर के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में नागरिक अपने घरों और भूखंडों के नियमितीकरण के लिए गुंठेवारी प्रस्ताव लेकर महानगरपालिका पहुंचे थे।

कई लोगों ने कर्ज, मकान बिक्री, बिजली और पानी कनेक्शन जैसे जरूरी काम इन प्रस्तावों पर निर्भर रखे थे। लेकिन प्रस्तावों की जांच और पंजीकरण तक नहीं हो पाने से नागरिक अनिश्चितता और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, 18 दिसंबर के बाद से जमा किए गए प्रस्ताव केवल स्वीकार तो किए गए, लेकिन कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण उनकी आवक-जावक तक दर्ज नहीं हो सकी। इससे नागरिकों को यह तक पता नहीं चल सका कि उनका आवेदन प्रक्रिया में है या नहीं।

प्रतिदिन मनपा मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं पीड़ित

कई नागरिक रोजाना कार्यालयों के चक्कर काटते रहे, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है।

चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित हुए। इसके बाद लगातार दो दिन अवकाश रहने से कामकाज में और देरी हुई।

सोमवार से कार्यालय खुले तो गुंठेवारी प्रकोष्ठ में जमा फाइलों के ढेर सामने आए। अब लगभग 200 से 300 प्रस्तावों की छानबीन शुरू की गई है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि एक महीने की देरी ने उनके निजी और आर्थिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

नागरिकों का यह भी कहना है कि चुनाव एक संवैधानिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके कारण आवश्यक नागरिक सेवाएं पूरी तरह ठप हो जाना चिंता का विषय है।

यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की गई होती, तो नागरिकों को इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती।

कई लोगों ने मांग की है कि भविष्य में चुनावी अवधि के दौरान भी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए अलग से कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।

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