इंदौर मॉडल पर संवरेगा छत्रपति संभाजीनगर, शहर के सौंदर्यीकरण के लिए ली जाएगी पेंट विक्रेताओं की मदद

Sambhajinagar City Beautification Drive: इंदौर मॉडल पर संभाजीनगर के सौंदर्यीकरण की तैयारी शुरू। दीपावली के बाद प्रमुख सड़कें, फ्लाईओवर और दीवारें सजेंगी। स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग लक्ष्य।
Chhatrapati Sambhajinagar City Beautification Drive Inspired On Indore Model
संभाजीनगर के सौंदर्यीकरण की तैयारी शुरू (सोर्स: AI)
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Chhatrapati Sambhajinagar City Beautification Drive: स्वच्छ भारत अभियान में देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुके इंदौर की तर्ज पर अब छत्रपति संभाजीनगर को भी आधुनिक और आकर्षक स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। महानगरपालिका ने शहर के प्रमुख मार्गों, फ्लाईओवरों, सुरक्षा दीवारों और महत्वपूर्ण चौकों का व्यापक सौंदर्यीकरण करने का निर्णय लिया है। दीपावली के बाद इस महत्वाकांक्षी अभियान की शुरुआत होगी।

इसका उद्देश्य केवल शहर को सुंदर बनाना ही नहीं, बल्कि आगामी स्वच्छ भारत सर्वेक्षण में बेहतर स्थान हासिल करना भी है।इसके तहत शहर के प्रमुख मार्गाें की दीवारे इंदौर की तर्ज पर सजाया जाएगा। उसके लिए शहर के बडे पेंट विक्रेताओं की मदद ली जाएगी।

महापौर समीर राजूरकर ने सोमवार को बताया कि हाल ही में उन्होंने नगरसेवक शिवाजी दांडगे और मनोज गांगवे के साथ इंदौर का दौरा कर वहां की स्वच्छता व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, नागरिक सहभागिता और शहरी सौंदर्यीकरण का विस्तृत अध्ययन किया। उसी अनुभव के आधार पर छत्रपति संभाजीनगर के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

मुख्य मार्गों और चौकों का बदलेगा स्वरूप

योजना के तहत शहर के विकास प्रारुप में शामिल प्रमुख मार्गों, फ्लाईओवरों की दीवारों, सुरक्षा दीवारों तथा प्रमुख चौकों की रंगाई-पुताई और कलात्मक सजावट की जाएगी। कई स्थानों पर भित्ति चित्र, आकर्षक रंग संयोजन और सौंदर्यीकरण के अन्य कार्य किए जाएंगे ताकि शहर का समग्र स्वरूप अधिक आकर्षक दिखाई दे।

महापौर ने बताया कि इंदौर में अनेक स्थानों पर रंग निर्माण करने वाली प्रतिष्ठित कंपनियों ने सामाजिक दायित्व के अंतर्गत रंग उपलब्ध कराए हैं। इसी प्रकार छत्रपति संभाजीनगर में भी जनसहभागिता और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से यह अभियान आगे बढ़ाया जाएगा।

स्वच्छता सर्वेक्षण को ध्यान में रखकर बनाई जा रही रणनीति

हाल ही में स्वच्छ भारत अभियान की केंद्रीय टीम ने शहर का निरीक्षण किया था। इसी को ध्यान में रखते हुए महानगरपालिका ने अभी से अगले स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी शुरू कर दी है। वर्षभर चरणबद्ध तरीके से सफाई, रखरखाव और सौंदर्यीकरण के कार्य किए जाएंगे ताकि शहर की स्वच्छता व्यवस्था लगातार बेहतर बनी रहे।

इंदौर की सफलता का सबसे बड़ा आधार है जनता का सहयोग

महापौर समीर राजूरकर ने कहा कि इंदौर की सफलता केवल प्रशासन की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि वहां के नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी इसकी सबसे बड़ी ताकत है। व्यापारी, होटल संचालक, प्रतिष्ठान मालिक और आम नागरिक सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फैलने देते तथा शहर को स्वच्छ बनाए रखने को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।

उन्होंने बताया कि इंदौर महानगरपालिका केवल जनजागरण और स्वच्छता के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए प्रतिवर्ष लगभग 15 करोड़ रुपये खर्च करती है। वहीं वृक्षारोपण और पौधों के संरक्षण को भी जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया है।

36 लाख आबादी के लिए 10 हजार सफाई कर्मचारी

इंदौर की लगभग 36 लाख की आबादी के लिए करीब 10 हजार सफाई कर्मचारी प्रतिदिन सड़कों पर सफाई कार्य करते हैं। शहर की अधिकांश सड़कों पर पेवर ब्लॉक लगाए गए हैं, जिससे धूल कम उड़ती है और सफाई बनाए रखना आसान हो गया है। पर्याप्त मानव संसाधन और नियमित निगरानी को इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

बायोगैस से होता है, सिटी बसों का संचालन

इंदौर ने कचरा प्रबंधन को आय के स्रोत में बदलने का सफल मॉडल विकसित किया है। वहां जैविक कचरे से बायोगैस तैयार की जाती है, जिससे लगभग 450 सिटी बसों का संचालन किया जाता है। महानगरपालिका के गैस पंपों पर यही गैस निजी वाहन चालकों को भी उपलब्ध कराई जाती है। महापौर ने कहा कि कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और उसके पुन: उपयोग का यह मॉडल देशभर के शहरों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है।

स्वच्छ और सुंदर शहर बनाने पर रहेगा विशेष जोर

महानगरपालिका का मानना है कि केवल सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शहर को आकर्षक, व्यवस्थित और पर्यावरण अनुकूल बनाना भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के साथ दीपावली के बाद सौंदर्यीकरण अभियान को गति दी जाएगी, ताकि छत्रपति संभाजीनगर स्वच्छता और सुंदरता दोनों क्षेत्रों में नई पहचान स्थापित कर सके।

– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट

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